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‘प्रियंका गांधी की टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की गरिमा का अपमान’, भाजपा बोली- अदालत स्वत: संज्ञान ले

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा राहुल गांधी को फटकारे जाने के बाद प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया पर बीजेपी ने तीखी आपत्ति जताई है। बीजेपी ने इसे कोर्ट की गरिमा का अपमान बताया और स्वतः संज्ञान लेने की मांग की। अमित मालवीय और निष्कांत दुबे ने कहा कि कानून सब पर समान होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा राहुल गांधी पर की गई टिप्पणी के बाद कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के बयान पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा ने प्रियंका के बयान को सुप्रीम कोर्ट की गरिमा पर सीधा हमला बताया है और शीर्ष अदालत से इस पर स्वत: संज्ञान लेने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि भाजपा सांसद के बयान पर कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था, तो गांधी परिवार पर भी वही कानून लागू होना चाहिए।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की भारतीय सेना पर की गई टिप्पणी को लेकर उन्हें फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि यदि आप सच्चे भारतीय हैं, तो ऐसी बात नहीं कहेंगे। इसके जवाब में प्रियंका गांधी ने बयान दिया कि यह तय करना न्यायाधीशों का काम नहीं है कि कौन सच्चा भारतीय है और कौन नहीं। प्रियंका के इसी बयान पर भाजपा ने तीखी आपत्ति जताई है।

भाजपा ने बताया न्यायपालिका का अपमान
भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि गांधी परिवार का यह रवैया न्यायपालिका का सीधा अपमान है। उन्होंने कहा कि अगर न्यायालय यह तय नहीं करेगा कि कौन राष्ट्रभक्त है और कौन नहीं, तो कौन करेगा? उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट की वैधता और अधिकार को चुनौती देने वाली बात बताया और कहा कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

निष्कांत दुबे केस का हवाला देकर स्वत: संज्ञान की मांग
भाजपा ने यह भी याद दिलाया कि जब सांसद निष्कांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट को अराजकता की ओर ले जाने वाला बताया था, तब कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। ऐसे में पार्टी का कहना है कि प्रियंका गांधी के बयान पर भी वही मापदंड लागू होना चाहिए। निष्कांत दुबे ने भी संसद परिसर में पीटीआई से बात करते हुए कहा कि अगर प्रियंका के बयान पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो लोगों का न्यायपालिका से विश्वास उठ जाएगा।

भाजपा ने बताया अहंकारी व्यवहार
एक ओर जहां प्रियंका गांधी अपने भाई राहुल के समर्थन में खड़ी हैं और अदालत की टिप्पणियों पर सवाल उठा रही हैं, वहीं भाजपा इसे गांधी परिवार का ‘अहंकारी व्यवहार’ बता रही है। भाजपा का तर्क है कि गांधी परिवार खुद को कानून से ऊपर समझता है और ऐसी सोच लोकतंत्र व संविधान की भावना के खिलाफ है। पार्टी ने जोर देकर कहा कि कानून सब पर समान रूप से लागू होना चाहिए, चाहे वह कोई भी हो।

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