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राज्य बाढ़ आपदा प्रबंधन द्वारा जिले मे किया गया राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल का आयोजन

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जिला अस्पताल भवन ढहने पर एसडीआरएफ की जीवंत मॉक ड्रिल, 45 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

एसडीआरएफ टीम को सूचना मिलने पर तत्काल घटना स्थल पहुंचकर आपदा से हताहत लोगों को राहत पहुंचाया गया

राज्य आपदा प्रबंधन द्वारा जिला अस्पताल एवं शिवनाथ नदी में आपदा के दौरान बचाव एवं राहत का किया किया गया जीवंत प्रदर्शन

ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया

बेमेतरा – भारत सरकार गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, नई दिल्ली के सहयोग से छत्तीसगढ़ राज्य बाढ़ आपदा प्रबंधन द्वारा आज पूरे प्रदेश में राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इसी परिप्रेक्ष्य में बेमेतरा जिले में जिला अस्पताल परिसर में भवन ढहने की स्थिति को आधार बनाकर एक जीवंत राहत और बचाव कार्य का प्रदर्शन किया गया। जानकारी के मुताबिक, मॉक ड्रिल के दौरान यह सूचना दी गई कि लगातार भारी बारिश के कारण जिला अस्पताल का भवन ढह गया है और उसमें 45 लोग दब गए हैं। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की टीम तत्काल घटना स्थल पर पहुंची और बिना समय गंवाए रेस्क्यू अभियान शुरू किया। भवन की तीसरी मंजिल में फंसे लोगों को रस्सियों और अन्य उपकरणों की मदद से सुरक्षित नीचे उतारा गया।


एसडीआरएफ जवानों ने आपदा की स्थिति में वैज्ञानिक तरीके से राहत एवं बचाव की पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। घायल नागरिकों को मौके पर ही चिकित्सा विभाग की टीम द्वारा प्राथमिक उपचार दिया गया और तत्पश्चात एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा गया। गंभीर रूप से घायल लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद हेलीकॉप्टर के माध्यम से उच्च स्तरीय अस्पतालों में रेफर किया गया। इस तरह सभी 45 हताहत लोगों को एसडीआरएफ टीम ने रेस्क्यू कर उनकी जान बचाई और राहत पहुंचाई।
इस जीवंत प्रदर्शन के दौरान कलेक्टर श्री रणवीर शर्मा एवं पुलिस अधीक्षक श्री रामकृष्ण साहू सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर श्री शर्मा ने मॉक ड्रिल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के पूर्वाभ्यास से नागरिकों को आपदा के समय राहत और बचाव की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ टीम ने वैज्ञानिक ढंग से यह प्रदर्शित किया कि विपरीत परिस्थितियों में कैसे नागरिकों की जान बचाई जा सकती है। कलेक्टर ने इसे आपदा के समय मनोवैज्ञानिक रूप से तैयार करने वाला अभ्यास बताते हुए कहा कि छोटी-छोटी जानकारी ही आपदा के समय जीवन बचाने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में दुर्घटना के दौरान हम जानमाल की रक्षा नहीं कर पाते हैं। ऐसे में आज का यह मॉक डील हमें भविष्य में किसी आपदा से निपटने के लिए मार्गदर्शन करेगा। इस मौके पर अपर कलेक्टर श्री प्रकाश भारद्वाज, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती ज्योति सिंह, डीएसपी श्रीमती कौशिल्या साहू, एसडीओपी बेरला श्री विनय कुमार एवं रक्षित निरीक्षक प्रवीण खलखो सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी तथा आपदा प्रबंधन बल के श्री अखिलेश पाराशर एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

शिवनाथ नदी टेमरी पुल पर बाढ़ में फंसे नागरिकों का एसडीआरएफ द्वारा सफल रेस्क्यू मॉक ड्रिल
राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल के अंतर्गत जिले में दूसरी जीवंत अभ्यास शिवनाथ नदी के टेमरी पुल पर किया गया। लगातार बारिश से नदी में आई बाढ़ को आधार बनाते हुए यह सूचना दी गई कि दो नागरिक बाढ़ के पानी में फंस गए हैं। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन की जानकारी पर एसडीआरएफ की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। एसडीआरएफ जवानों ने बाढ़ के तेज बहाव से घिरे दोनों लोगों को बचाने के लिए नाव एवं रस्सियों का सहारा लिया और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। इस दौरान जवानों ने यह भी प्रदर्शित किया कि यदि बाढ़ पीड़ित व्यक्ति के शरीर में अधिक पानी चला जाए और वह बेहोश हो जाए तो किस प्रकार सीपीआर देकर उसे सामान्य स्थिति में लाया जा सकता है। दोनों नागरिकों को प्राथमिक उपचार के बाद एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल भेजा गया, जिससे उनकी जान बचाई जा सकी।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एसडीआरएफ जवानों ने नाव, रस्सी और लाइफ जैकेट की मदद से बाढ़ में फंसे दोनों नागरिकों तक पहुंच बनाई। तेज धारा के बीच फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद जोखिम भरा था, लेकिन टीम ने पूरी दक्षता और साहस का परिचय देते हुए उन्हें सकुशल बाहर निकाल लिया। इस दौरान जवानों ने बाढ़ के दौरान उपयोग किए जाने वाले वैज्ञानिक तरीकों का प्रदर्शन किया, जैसे – बहाव के विपरीत दिशा में नाव का संचालन, लाइफ जैकेट का सुरक्षित उपयोग, और फंसे नागरिकों को मनोबल बनाए रखने के लिए लगातार संवाद करना। रेस्क्यू के बाद यह भी प्रदर्शित किया गया कि यदि बाढ़ में फंसे व्यक्ति के शरीर में अधिक पानी चला जाए और वह बेहोश हो जाए, तो उसे सीपीआर देकर कैसे होश में लाया जाता है। टीम ने प्राथमिक उपचार के सभी चरणो को दिखाया जैसे घायलों को स्ट्रेचर पर सुरक्षित रखना, उन्हें प्राथमिक दवाइयाँ देना और नजदीकी अस्पताल तक सुरक्षित ले जाना। प्रभावित नागरिकों को एंबुलेंस के माध्यम से तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया, जिससे उनकी जान बचाई जा सकी।
इस जीवंत मॉक ड्रिल का उद्देश्य नागरिकों को यह संदेश देना था कि आपदा की स्थिति में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि त्वरित सूचना देकर बचाव दल की मदद लेनी चाहिए। इससे यह भी प्रदर्शित हुआ कि बाढ़ जैसी आपदाओं में हर मिनट कीमती होता है और समय पर रेस्क्यू से जानमाल की रक्षा संभव है। कार्यक्रम में उपस्थित कलेक्टर श्री रणवीर शर्मा ने कहा कि इस प्रकार के पूर्वाभ्यास नागरिकों और प्रशासन दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इससे हमें यह समझने और सीखने का अवसर मिलता है कि वास्तविक आपदा के समय कैसे त्वरित और वैज्ञानिक तरीके से राहत एवं बचाव कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ टीम ने जिस सूझबूझ और तत्परता के साथ रेस्क्यू अभियान प्रदर्शित किया, वह अनुकरणीय है और इससे जिला प्रशासन को भी आपदा से निपटने की तैयारियों में मजबूती मिलेगी।
पुलिस अधीक्षक श्री रामकृष्ण साहू ने भी इस मॉक ड्रिल की सराहना करते हुए कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा कभी भी आ सकती है, इसलिए नागरिकों और बचाव बल दोनों को हमेशा तैयार रहना चाहिए। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि नदी-नालों और बाढ़ग्रस्त इलाकों में अनावश्यक जोखिम न लें और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें।

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