ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया
थानखम्हरिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने नगर में रविवार को शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में पथ संचलन कार्यक्रम का आयोजन किया। पथ संचलन सरस्वती शिशु मंदिर से प्रारंभ किया गया जो मुख्य मार्गों से निकाला गया, और लोगों को राष्ट्र के प्रति निष्ठा, समर्पण, अनुशासन का बोध कराया। पथ संचलन का जगह-जगह माताओं ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। संघ के दुर्ग विभाग बौद्धिक प्रमुख मुख्य वक्ता माननीय श्री राम मुरारी जी, महंत वसंत बिहारी दास, हेमंत साहू खंड कार्यवाह के आतिथ्य में कार्यक्रम आयोजित किया गया। श्री राम मुरारी जी ने संबोधन में कहा कि शताब्दी वर्ष स्वयं सेवकों के लिए उत्सव का पर्व है। संघ ने तमाम आपदाएं झेली हैं।
आपत्तियों, विपत्तियां, संकटों का सामना करते हुए विशाल वट वृक्ष के रूप में खड़े होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि संघ को समझने के लिए सभी को शाखा में जाने की जरूरत है। उसके बाद राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। शताब्दी वर्ष की अनुभूति हर स्वयंसेवक में नई ऊर्जा व दायित्व का बोध करा रही थी। विजयदशमी वर्ष 1925 में नागपुर में डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक अनुशासन में पथ संचलन निकाला। घोष की धुन पर पूर्ण गणवेश में कदमताल करते हुए सैकड़ों स्वयंसेवकों ने पथ संचलन में भाग लिया। बड़ी संख्या में स्वयंसेवक व्यवस्था में लगे रहे। पथ संचलन को देखने के लिए लोग सड़क किनारे उमड़ पड़े। ग्रामीण अंचल से भी स्वयंसेवकों ने भी अपनी भागीदारी निभाई। वक्ताओं ने संघ की स्थापना की आवश्यकता उद्देश्य सेवा उसकी 100 वर्ष की यात्रा पर प्रकाश डाला। आगे राम मुरारी यादव ने अपने संबोधन में कहा जब समस्त देवता गण राक्षसों से हारने लगे तो मां भगवती व अन्य देवताओं द्वारा प्रभु राम को शस्त्र अर्पण किया गया तब जाकर रावण से विजय प्राप्त किया। छत्रपति शिवाजी महाराज ने महाराष्ट्र की भूमि में स्वराज की स्थापना की। रामायण की, महाभारत की, शिक्षा देकर छत्रपति शिवाजी हो गए। महाराणा हमारे प्रेरणास्रोत थे हमारा इतिहास संघर्ष का इतिहास है। आगे आपने बताया, गुरु गोविंद सिंह ने अपना परिवार का बलिदान कर दिया लेकिन धर्म नहीं बदला। हिंदुओं की आत्मा को विधर्मियों के द्वारा कुचलने का प्रयास किया गया। और हमारे आस्था के केंद्रों को भी कुचलने का प्रयास किया गया। क्योंकि हम जाति में बॅटे हुए हैं, हमें संगठित होने की आवश्यकता है। मंदिरों को बचाने के लिए हजारों लोगों ने अपने प्राण का न्योछावर कर दिया। एक के बाद एक विधर्मियों के द्वारा हमारे मंदिरों को तोड़ा गया। राष्ट्र को जगाने का उद्गम अभियान राष्ट्रीय सेवक संघ के द्वारा निरंतर प्रयास किया जा रहा है। संगठन का अभाव है, जातियों में बॅटा है, अखंड भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई हमने लड़ी है। संघ को कुचलने का प्रयास किया गया। लेकिन हमने कभी हिम्मत नहीं हारी। परिश्रम, लगन, मेहनत से निरंतर आगे बढ़ते गए। लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल गए। 1990 में कार सेवक प्रारंभ हुयी। समाज में समरसता का मंत्र देकर जोड़ने का प्रयास किया। संघ विस्तार करने में अहम भूमिका निभाई। जब तक हम अपने आप को नहीं जगाएंगे। तब तक हम महत्वपूर्ण कार्य नहीं कर पाएंगे। हिंदू समाज को जगाने का काम सैकड़ों साल से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कर रहा है। हिंदू समाज अपनी निद्रा से जागे, इस्लामी धर्मांतरण युवाओं की मति को भ्रमित कर रहे हैं। एक-एक गांव में शाखा खोलने की बात कही। समाज परिवर्तन के लिए काम करना पड़ेगा। हमें अपने संगठन शक्ति का प्रदर्शन करना होगा। पंच परिवर्तन लेकर घर-घर जाना होगा। धर्म संस्कृति जीवन के मूल्य की शिक्षा अपने बच्चों को दें। संघ का कार्य ईश्वरीय कार्य है। कार्यक्रम का संचालन राकेश जोशी एवं जगराखन मण्डावी द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से साजा विधायक ईश्वर साहू, पं. ओमप्रकाश जोशी, चंदन अग्रवाल, राजेश ठाकुर, अनिल सिंघानिया, सुरेश सिंघानिया, पुरुषोत्तम सिंघानिया, पुरुषोत्तम अग्रवाल, रामबिलाश शर्मा, चंद्रशेखर राजपूत, आदर्श जोशी, सरस्वती शिशु मंदिर प्राचार्य लखन साहू, राजेश राजपूत, युवराज साहू, देवकुमार ताम्रकार, मुन्ना सिंघानिया, राजेश सिंघानिया, चेतन सिन्हा, टीकम अग्रवाल, सरिता जैन, रेखा शर्मा, नमिता सिन्हा आदि उपस्थित थे।



