* संस्कारों की ज्योति से हुआ जीवन आलोकित
थानखम्हरिया। “ब्रह्मज्ञान और पवित्रता के मार्ग का प्रथम द्वार है उपनयन संस्कार” इसी भाव के साथ स्थानीय रामजीलाल जगदीश प्रसाद भवन में ब्राह्मण परिवार के आठ लोगों का यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार वेद, शास्त्र सम्मत पूर्ण विधि-विधान से संपन्न हुआ।
पं. ओमप्रकाश जोशी के सानिध्य एवं पं. ज्ञानप्रकाश जोशी तथा पं. विपिन शर्मा के मंत्रोच्चार, हवन आदि वैदिक क्रियाओं के मध्य बालकों एवं युवाओं को जनेऊ धारण कराया गया। जनेऊ धारण करते ही सभी ने पारंपरिक रीति से उपस्थित परिवारजनों से भिक्षा ग्रहण कर वैदिक परंपरा का पालन किया। इस अवसर पर श्री निवास जी शास्त्री ने मंत्र दीक्षा प्रदान करते हुए कहा “यज्ञोपवीत व्रत है, और व्रत से ही मानव का उत्थान संभव है। ब्राह्मण जन्म से नहीं, बल्कि संस्कार एवं ब्रह्मत्व गुणों से बनता है।” यह संस्कार जीवन में ज्ञान, शुचिता और अनुशासन का अद्वितीय संदेश देता है। नैतिक मूल्यों के रक्षण एवं जिम्मेदारियों के पालन का भाव जागृत करता है। यह सनातन के सोलह संस्कारों में से है जिसमें तीन पवित्र धागों से बना जनेऊ पहनाया जाता है जो देव ऋण, पितृ ऋण और ऋषि ऋण का प्रतीक है। जनेऊ संस्कार ग्रहण करने वाले हैं तुषार जोशी, राजा जोशी, तरुण जोशी, नयन जोशी, कृष्ण जोशी, रुद्रांश जोशी, अर्णव जोशी एवं शुभम शर्मा। कार्यक्रम में नगर के गणमान्य नागरिकों एवं परिजनों की उपस्थिति रही। अंत में सभी ने भोजन प्रसादी ग्रहण किया।




