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असंग देव साहेब कबीर पंथ की 21वीं सदी की अगुवाई: परंपरा, युवा शक्ति और आधुनिक भारत की नई आशा

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कबीर पंथ की आत्मा सदा से सत्य, समता और मानवता के मूल्यों में रमी रही है। इसी उज्ज्वल परंपरा को 21वीं सदी में नई दृष्टि और नई दिशा देने का कार्य असंग देव साहेब कर रहे हैं। वे केवल कबीर पंथ के पुरोधा नहीं हैं, बल्कि समय की नब्ज समझने वाले ऐसे मार्गदर्शक हैं, जो अध्यात्म को आधुनिक युग की जरूरतों से जोड़कर देखते हैं।

पूज्य असंग देव साहेब की प्रेरणा से देवकर साहेब के सानिध्य में आज छत्तीसगढ़ में कबीर पंथ एक नए, सशक्त स्वरूप में उभर रहा है। यह स्वरूप केवल भजन, साधना या परंपरागत प्रवचनों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज, युवाओं और राष्ट्रनिर्माण से गहराई से जुड़ा हुआ है।

 

इसी वैचारिक पुनर्जागरण का प्रतीक है कि असंग देव साहेब की प्रेरणा और देवकर साहेब के सानिध्य में, परम पूज्य मोहन भागवत जी के संरक्षकत्व में, 31 दिसंबर को कबीर पंथ सोनपरी आश्रम में विशाल हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया है। यह सम्मेलन आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभाव को एक मंच पर लाने का सशक्त प्रयास है।

युवा कबीरपंथी: नई ऊर्जा, नई सोच

छत्तीसगढ़ में युवा कबीरपंथी आज केवल अनुयायी नहीं, बल्कि परिवर्तन के वाहक बन रहे हैं। वे कबीर साहेब के विचार—कर्म, आत्मसम्मान, नशामुक्ति, जातिविहीन समाज और श्रम की गरिमा—को अपने जीवन में उतारते हुए शिक्षा, स्वरोजगार और नवाचार की ओर बढ़ रहे हैं। यह युवा वर्ग आध्यात्मिक जड़ों के साथ आधुनिक तकनीक को अपनाकर एक संतुलित समाज की रचना कर रहा है।

कॉरपोरेट और स्टार्टअप जगत से संवाद
देवकर साहेब की विशेषता यह है कि वे कबीर पंथ को आज के कॉरपोरेट जगत और स्टार्टअप संस्कृति से जोड़कर देखते हैं। उनके विचारों में कबीर का “कर्मयोग” आज के उद्यमिता मॉडल में स्पष्ट झलकता है—ईमानदारी, पारदर्शिता, श्रम और सामाजिक उत्तरदायित्व। छत्तीसगढ़ के युवा उद्यमियों को वे केवल मुनाफे तक सीमित न रहने, बल्कि रोजगार सृजन और समाज सेवा को अपने व्यवसाय का अभिन्न अंग बनाने की प्रेरणा देते हैं।

हिंदुत्व हृदय और मर्यादित राष्ट्रभाव

कबीर पंथ का मूल स्वभाव समरसता है। असंग देव साहेब का दृष्टिकोण हिंदुत्व के हृदय से उपजा हुआ है—ऐसा हिंदुत्व जो जोड़ता है, तोड़ता नहीं; जो संस्कार देता है, न कि घृणा। मर्यादा, करुणा और राष्ट्रभाव उनके विचारों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यही कारण है कि वे युवा पीढ़ी को धार्मिक कट्टरता से दूर रखते हुए सांस्कृतिक आत्मगौरव की ओर उन्मुख करते हैं।

 

असंग देव साहेब और साहिब बंदगी देवकर साहेब के नेतृत्व में कबीर पंथ आज 21वीं सदी की चुनौतियों और संभावनाओं के बीच एक नई आशा बनकर उभर रहा है। सोनपरी आश्रम में आयोजित विशाल हिंदू सम्मेलन इस यात्रा का सशक्त पड़ाव है, जहाँ आध्यात्म, युवाशक्ति, उद्यमिता और राष्ट्रभाव एक साथ मिलकर एक जागरूक, आत्मनिर्भर और समरस भारत के निर्माण की दिशा तय कर रहे हैं।

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