राज्य में पिछले छह साल के दौरान 15 लाख से ज्यादा वाहन चालकों ने ट्रैफिक नियम तोड़ा, उसमें केवल 5 लाख ने ही चालान अदा किया है। करीब 10 लाख वाहन चालकों ने चालान नहीं पटाया। आंकड़ा चौंकाने वाला है, लेकिन जब से चौक-चौराहों और टोल नाके में कैमरे लगे हैं, तब से ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहन चालक बच नहीं पा रहे हैं। भले ही रोड पर उनका चालान नहीं हो रहा है लेकिन चौराहों पर लगा कैमरा वाहनों की फोटो खींच रहा है और चालान की ऑन लाइन कॉपी गाड़ी मालिक के मोबाइल पर भेजी जा रही है।
इसके बावजूद लोग चालान नहीं अदा कर रहे हैं। इस वजह से पेंडिंग चालान की संख्या दस लाख और जुर्माने की रकम 160 करोड़ के पार पहुंच गई है। पेंडिंग 10 लाख वाहनों में ट्रैफिक पुलिस 7 लाख से अधिक हैं। यानी ट्रैफिक पुलिस के माध्यम से ज्यादा चालान हो रहे हैं। राज्य के लगभग सभी प्रमुख चौक चौराहों पर आईटीएमएस के कैमरे लगे हैं। इस वजह से शहर के सड़कें 24 घंटे निगरानी में रहती है।
ट्रैफिक पुलिस कार और भारी वाहनों के साथ-साथ बाइक व मोपेड चालकों का भी चालान ऑनलाइन कैमरे के माध्यम से कर रही है। इस वजह है ट्रैफिक पुलिस के माध्यम से कार्रवाई की संख्या केवल छह साल में 12 लाख से ज्यादा पहुंच गई है। परिवहन विभाग का फोकस भारी वाहन और कार पर रहता है। इस वजह से यहां चालान की संख्या कम रहती है।
ट्रैफिक पुलिस इन नियमों को तोड़ने पर भेजती है चालान
- बिना हेलमेट बाइक-मोपेड सवारी पर
- कार में सीट बेल्ट न बांधने पर
- नो पार्किंग में कार-बाइक पार्क करने पर
- रांग साइड कार-बाइक चलाने पर
- चौक-चौराहों पर सिग्नल जंप करने पर
- हाई स्पीड कार-बाइक चलाने पर
- शराब पीकर कार-बाइक चलाने पर
- ट्रिपल सवारी बाइक-मोपेड चलाने पर
- आरटीओ इन नियमों को तोड़ने पर करता है चालान
- कार का फिटनेस और प्रदूषण सर्टिफिकेट न होने पर
- टैक्सी गाड़ी का परमिट रिनीवल न कराने पर
- कार-भारी वाहन का इंश्योरेंस न होने पर।
पते और मोबाइल नंबर बदल गए तो ऐसे कराएं अपडेट
कई ऐसे वाहन चालक हैं जिनके पते और मोबाइल नंबर बदल गए हैं। ऐसे वाहन चालकों के चालान जनरेट तो रहे हैं लेकिन उन्हें नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे वाहन चालक ऑन लाइन ही अपना नया पता और मोबाइल नंबर अपडेट करवा सकते हैं। इसके लिए उन्हें परिवहन विभाग के पोर्टल में जाकर छत्तीसगढ़ सलेक्ट करना होगा। ये सलेक्ट करने के बाद वाहन सर्विस वाले कॉलम में जाना होगा। इसे सलेक्ट करने के बाद जिले का ऑप्शन आएगा। फिर अलग-अलग विकल्प आते जाएंगे और इसी में पता और मोबाइल नंबर अपडेट करने का ऑप्शन आ जाएगा।
नंबर प्लेट से पता चल जाता है वाहन मालिक कौन
2012 के बाद जितने वाहनों की बिक्री हो रही है, उसे खरीदने वाले का स्थायी पता, मोबाइल नंबर और आधार कार्ड परिवहन विभाग के पास उपलब्ध है। इस वजह से जब कैमरा ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले किसी वाहन की फोटो खींचता है तब नंबर प्लेट के आधार पर पता लगा लिया जाता है कि वाहन मालिक कौन है और उसका पता क्या है। मोबाइल नंबर भी मिल जाता है। फिर चालान बनाकर वाहन मालिक के पते और मोबाइल पर भी एक साफ्ट कॉपी भेज दी जाती है। यही वजह है कि कैमरे लग जाने के बाद से चालानी कार्रवाई बढ़ गई है।




