ब्यूरो चीफ: अनिल सिंघानिया
थान खम्हरिया। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित गणगौर पर्व की नगर में धूम देखने को मिल रही है। होली के दिन से ही नवविवाहित महिलाएं और युवतियां पूरे उत्साह व श्रद्धा के साथ गणगौर की पूजा-अर्चना कर रही हैं तथा अपने अखंड सुहाग और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना कर रही हैं।

चैत्र माह में मनाए जाने वाले इस पारंपरिक उत्सव में महिलाएं मिट्टी की गणगौर प्रतिमाओं को सजाती हैं और पारंपरिक गीत गाते हुए पूजा करती हैं। नवविवाहिताएं प्रतिदिन विधि-विधान से गणगौर की आराधना करती हैं। चैत्र शुक्ल द्वितीया के दिन महिलाएं नदी, तालाब या सरोवर पर जाकर पूजी हुई गणगौर प्रतिमाओं को जल अर्पित करती हैं। यह क्रम लगभग 15 दिनों तक चलता है।
इस अवसर पर श्रीमती प्रीति बिंदल ने बताया कि गणगौर पूजा प्रेम, पारिवारिक सौहार्द और दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि का एक अत्यंत पावन पर्व माना जाता है। उन्होंने कहा कि गणगौर का यह उत्सव लगभग 16 से 18 दिनों तक मनाया जाता है और यह विशेष रूप से महिलाओं के बीच भक्ति, आस्था और आपसी स्नेह का प्रतीक है।
मान्यता है कि यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का प्रतीक होता है, वहीं कुंवारी कन्याएं अच्छे और योग्य वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं। श्रद्धा और समर्पण के साथ गणगौर की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। उत्सव के अंतिम दिन शोभायात्रा निकालकर गणगौर प्रतिमाओं का विधिवत विसर्जन किया जाता है।




