पर्यटन विभाग के बजट में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 55 प्रतिशत की वृद्धि
पर्यटन विभाग के अंर्तगत तीन नई योजनाओं हेतु कुल 110 करोड़ रूपए का प्रावधान
मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन हेतु 100 करोड़, शक्तिपीठ भ्रमण योजना हेतु 5 करोड़, छत्तीसगढ़ युवा दर्शन योजना हेतु 5 करोड़ रूपए का प्रावधान
मुख्यमंत्री जन-पर्यटन प्रोत्साहन योजना हेतु 3 करोड़ रूपए का प्रावधान, छत्तीसगढ़ राज्य के आम नागरिकों को आईआरसीटीसी के माध्यम से पर्यटन स्थलों के भ्रमण मे 75 प्रतिशत तक सब्सिडी
पर्यटन क्षेत्रों में विभिन्न विकास कार्यों हेतु अनुदान मद के अंर्तगत 100 करोड़ रूपए का प्रावधान
श्री रामलला दर्शन योजना के लिए 36 करोड़ रूपए का प्रावधान
शक्तिपीठ परियोजना के अंर्तगत छत्तीसगढ़ के पांच शक्तिपीठों को विकसित किए जाने हेतु 5 करोड़ रूपए का प्रावधान
सिरपुर एकीकृत विकास योजना हेतु 10 करोड़ रूपए का प्रावधान, सिरपुर को हेरिटेज स्थल के रूप मंे किया जाएगा विकसित
राजकीय मानव संग्रहालय, छत्तीसगढ़ इतिहास संग्रहालय, अभिलेखागार एवं भारत भवन का किया जाएगा निर्माण
सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और कलाकारों के प्रोत्साहन पर विशेष जोर
मंदिरों के जीर्णाेद्धार और प्रमुख मेलों के आयोजन को मिलेगा प्रोत्साहन
रायपुर / छत्तीसगढ़ विधानसभा में पर्यटन, संस्कृति, पुरातत्व तथा धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के वर्ष 2026-27 के लिए अनुदान मांगों को सदन में पारित किया गया। विभागीय मंत्री श्री राजेश अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत बजट पर चर्चा के बाद इन विभागों के लिए कुल 492 करोड़ 20 लाख रुपये की अनुदान मांगें पारित की गईं, इसमेें पर्यटन विभाग के लिए 344 करोड़ रूपए, संस्कृति विभाग के लिए 98.20 करोड़ रूपए तथा धार्मिक न्यास तथा धर्मस्व विभाग के लिए 50 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।
सदन में बजट भाषण के दौरान मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, प्राकृतिक पर्यटन स्थलों और धार्मिक आस्था से जुड़ी विरासत से है। राज्य सरकार इन तीनों क्षेत्रों को समन्वित रूप से विकसित कर छत्तीसगढ़ को पर्यटन और सांस्कृतिक दृष्टि से देश के प्रमुख राज्यों में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इन विभागों के बजट में पर्यटन अधोसंरचना के विकास, सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और धार्मिक स्थलों के संवर्धन को प्राथमिकता दी गई है।
पर्यटन विभाग
मंत्री श्री अग्रवाल ने बताया कि पर्यटन विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 344 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के माध्यम से राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों, पर्यटन सर्किटों और पर्यटक सुविधाओं का व्यापक विकास किया जाएगा। इसके लिए इस वर्ष 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे पर्यटन स्थलों की अधोसंरचना, ब्रांडिंग, स्वच्छता, पेयजल और पर्यटक सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए श्री रामलला दर्शन योजना के अंतर्गत अब तक 52 विशेष ट्रेनों के माध्यम से लगभग 44 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को निःशुल्क दर्शन कराया जा चुका है और इसके लिए इस वर्ष 36 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ आस्था पथ (शक्तिपीठ भ्रमण) योजना के माध्यम से राज्य के प्रमुख शक्तिपीठों को जोड़कर धार्मिक पर्यटन को नई दिशा दी जाएगी। इस योजना हेतु 5 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि राज्य में साहसिक पर्यटन और जल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत जलाशयों और प्राकृतिक स्थलों पर जल क्रीड़ा तथा एडवेंचर गतिविधियों के विकास के लिए बजट में 5 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।
मंत्री श्री अग्रवाल ने जानकारी दी कि पर्यटन क्षेत्रों में विभिन्न विकास कार्यों हेतु 100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है, इसके अंर्तगत भोरमदेव कॉरिडोर का विकास, मयाली-बगीचा के विकास के अंर्तगत जशपुर जिले के मधेश्वर पहाड़ के निकट स्थित मयाली मंे पर्यटक रिसॉर्ट, स्किल डेवलपमेंट सेंटर का विकास एवं बगीचा स्थित कैलाश गुफा में पर्यटन विकास के कार्य कराए जाएंगे। उन्होेंने आगे कहा कि नया रायपुर मंे चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं कन्वेंशन सेेंटर का निर्माण किया जा रहा है। बस्तर एवं सरगुजा के आदिवासी क्षेत्रों में बस्तर टूरिज्म सर्किट एवं जशपुर टूरिज्म सर्किट के तहत विकास कार्य कराए जाएंगे जिससे छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन स्थलों का स्वरूप और अधिक निखरकर सामने आएगा।
मंत्री श्री अग्रवाल ने आगे कहा कि पर्यटन प्रोत्साहन अनुदान मद में 5 करोड़ की वृद्धि कर 10 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अंर्तगत बस्तर, सरगुजा एवं अन्य संभावित पर्यटन क्षेत्रों मंे पर्यटकों के लिए होमस्टे सुविधा एवं सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इस योजना के तहत राज्य के आर्थिक विकास एवं पर्यटन के विकास के लिए निजी निवेशकों एवं स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
शक्तिपीठ परियोजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ के पांच शक्तिपीठों को उत्तराखंड की चारधाम परियोजना की तर्ज पर विकसित करने और जोड़ने का कार्य किया जाना है। इस हेतु बजट मंे 5 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। सिरपुर को बुद्धिष्ट थीम पर हेरिटेज स्थल के रूप मंे विकसित किया जाएगा, इसके लिए सिरपुर विकास योजना केे तहत 10 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।
छत्तीसगढ़ राज्य के आम नागरिकों को मुख्यमंत्री जन-पर्यटन प्रोत्साहन योजनांर्तगत आईआरसीटीसी के माध्यम से 75 प्रतिशत सब्सिडी मंे छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलांे का भ्रमण कराया जाएगा। इस हेतु बजट में 3 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। प्रथम चरण में राजधानी रायपुर से जगदलपुर एवं बारनवापारा-सिरपुर टूर तैयार किया जा रहा है।
पर्यटन विभाग के अंर्तगत नया रायपुर स्थित भारतीय होटल प्रबंधन संस्थान हेतु 4 करोड़ रूपए, स्टेट टूरिज्म अवार्ड हेतु 5 लाख रूपए एवं छत्तीसगढ़ पर्यटन के प्रचार-प्रसार एवं ब्राडिंग हेतु मेला, उत्सव, प्रर्दशनी अनुदान मद मंे 8.50 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंट तथा स्टेक होल्डर्स से संपर्क कर उन्हें छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के लिए कार्य किए जाने हेतु प्रोत्साहित करने प्रमुख 10 शहरों में रोड शो और बिजनेस मीटिंग का अयोजन किया जाएगा, जिससे राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।
संस्कृति एवं पुरातत्व
मंत्री श्री अग्रवाल ने बताया कि संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 98 करोड़ 20 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। राज्य में राजकीय मानव संग्रहालय, इतिहास संग्रहालय और अभिलेखागार के निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है, जिससे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित कर नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत किया जा सके। मंत्री श्री अग्रवाल ने बताया कि बस्तर पंडुम 2026 का भव्य आयोजन फरवरी माह में किया गया। जिसका शुभारंभ भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु एवं समापन गृहमंत्री श्री अमित शाह के गरिमामय उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम तीन चरणों में सम्पन्न हुआ जिसमें 12 विधाओं में 54 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। यह कार्यक्रम बस्तर संभाग के पंचायतों एवं नगरीय निकायों में सम्पन्न हुआ। गत वर्ष आयोजित बस्तर पंडुम 2025 को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया, जो विभाग के लिए गौरव की बात है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि कलाकारों के प्रोत्साहन, सांस्कृतिक आयोजनों के विस्तार और लोक कलाओं के संरक्षण के लिए भी बजट में प्रावधान बढ़ाया गया है। इसके साथ ही पुरखौती मुक्तांगन संग्रहालय के विकास और राज्य की पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के लिए भी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। पुरखौती मुक्तांगन संग्रहालय उपरवारा नवा रायपुर परिसर में आंचलिक इतिहास को प्रदर्शित करने छत्तीसगढ़ इतिहास संग्रहालय, अभिलेखागार एवं भारत भवन के निर्माण हेतु इस बजट मंे 2.70 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। इस हेतु डीपीआर तैयार किया गया है, जिसका अनुमानित व्यय लगभग 48 करोड़ रूपए है। मानव सभ्यता एवं संस्कृति के विकास एवं छत्तीसगढ़ में निवासरत विभिन्न जनजातीय समुदायों के जीवन-पद्धति, रहन-सहन, खानपान, आचार-विचार, वेशभूषा एवं संस्कृति को प्रर्दशित किए जाने हेतु राजकीय मानव संग्रहालय की स्थापना भी की जाएगी। भारत के राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर तृतीय एवं चतुर्थ चरण के कार्यक्रमों के लिए इस बजट में 2 करोड़ रू. का प्रावधान किया गया है।
प्रदेश के अर्थाभावग्रस्त ख्यातिप्राप्त साहित्यकारों एवं कलाकारों को पूर्व में 2 हजार रू. मासिक वित्तीय सहायता दिया जा रहा था, इस राशि में वृद्धि कर 5 हजार किया गया है। इस वर्ष के बजट में अर्थाभावग्रस्त ख्यातिप्राप्त साहित्यकारों एवं कलाकारों के सहायता हेतु 1 करोड़ 50 लाख रूपए का बजट प्रावधान रखा गया है। मुख्यमंत्री लोककलाकार प्रोत्साहन योजनांर्तगत राज्य की कला एवं सांस्कृतिक परंपरा के अंतर्गत छत्तीसगढ़ अंचल के विविध लोककलाओं, नृत्य संगीत, लोकनाट्य तथा शिल्पकला के कलाकारों के प्रोत्साहन के लिए 30 लाख रूपए का बजट स्वीकृत किया गया है। इसी तरह अशासकीय निजी संस्थाओं हेतु आर्थिक अनुदान अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 5 करोड़ 75 लाख का प्रावधान किया गया है। इसी तरह छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद अंतर्गत संचालित आदिवासी एवं लोक कला अकादमी के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में वृद्धि करते हुए 2 करोड़ 20 लाख रूपए का बजट प्रावधान रखा गया है।
विभाग के द्वारा संपादित उत्खन्न सर्वेक्षण कार्यों का प्रतिवेदन, शोध-संगोष्ठी एवं शोध पत्रिका तथा पांडुलिपि प्रकाशन आदि के लिए 45 लाख रूपए और प्राचीन शिल्पों के प्रतिकृति निर्माण के लिए 16 लाख 80 हजार रूपए के बजट का प्रावधान किया गया है। इसी तरह प्राचीन धरोहरों के संरक्षण के लिए 4 करोड़ 60 लाख रूपए, पुरखौती मुक्तांगन संग्रहालय विकास के लिए 7 करोड़ 80 लाख, प्राचीन स्थलों के संरक्षण उत्खनन के लिए 1 करोड़ 20 लाख तथा शोध संगोष्ठी एवं प्रदर्शन के आयोजन के लिए 75 लाख रूपए का बजट प्रावधान किया गया है।
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग
धर्मस्व मंत्री श्री अग्रवाल ने बताया कि धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के लिए वर्ष 2026-27 में 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसके अंतर्गत राज्य के मंदिरों और धार्मिक स्थलों के जीर्णाेद्धार, धर्मशालाओं के निर्माण तथा श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजिम कुंभ, गिरौदपुरी मेला, बस्तर दशहरा, जशपुर दशहरा, डोंगरगढ़ में चैत्र एवं क्वांर नवरात्रि मेला जैसे प्रमुख धार्मिक आयोजनों के लिए भी बजट का प्रावधान किया गया है, जिससे इन आयोजनों की गरिमा और व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जा सके।
मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करते हुए कैलाश मानसरोवर यात्रा और सिंधु दर्शन यात्रा के लिए भी आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है, जिससे छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक श्रद्धालु इन पवित्र स्थलों की यात्राओं में शामिल हो सकें। उन्होंने कहा कि पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक आस्था छत्तीसगढ़ की पहचान के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। इन क्षेत्रों के समग्र विकास से न केवल राज्य की गौरवशाली विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी सृजित होंगे। विधानसभा में अनुदान मांगों के पारित होने के साथ ही इन विभागों की योजनाओं को आगामी वित्तीय वर्ष में और गति मिलेगी।




