नरेन्द्र कुमार सेन
किडनी बीमारी की खबर के बाद कलेक्टर ने किया पथर्री का दौरा
विशेष स्वास्थ्य शिविर में लगाकर ग्रामीणों का किया स्वास्थ्य जांच
पानी के नमूनों की जांच जारी, फ्लोराइड की मात्रा मानक के अनुरूप
गरियाबंद /फिगेंश्वर विकासखण्ड के ग्राम पथर्री में किडनी संबंधी बीमारियों के मीडिया में खबर प्रकाशन होने के उपरांत ग्रामीणों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए तत्काल कलेक्टर बीएस उइके ने आज स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ गांव का दौरा किया। इस दौरान ग्रामीणों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की स्वास्थ्य जांच किया गया।
कलेक्टर उइके ने ग्रामीणों से कहा कि वे अनावश्यक अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराएं नहीं। उन्होंने कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है। कलेक्टर उइके ने कहा कि वर्तमान में स्थिति सामान्य है तथा प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इस दौरान एसडीएम राजिम श्री विशाल महाराणा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. यूएस नवरत्न, लोक स्वास्थय यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अधिकारी विप्लव घृतलहरे सहित अन्य अधिकारी, चिकित्सक एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने गांव के विभिन्न शासकीय पेयजल एवं घरों के निजी बोर के पेयजल स्रोतो के पानी के नमूने एकत्रित किया गया। जिसे त्वरित फिल्ड टेस्ट किट के माध्यम से फ्लोराइड की मात्रा जांच की गई। प्रारंभिक जांच में पानी में फ्लोराइड की मात्रा मानक के अनुकूल पाई गई। इसके अलावा पेयजल गुणवत्ता जांच के लिए उपखंड, खंड तथा राज्य स्तरीय जल परीक्षण प्रयोगशाला में पेयजल के नमूनों की जांच और गहन तरीके से कराया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संदेहास्पद किडनी के मरीजों के घर-घर जाकर उनके मेडिकल रिपार्ट का परीक्षण किया गया। जिसमें 04 लोगो का रिपोर्ट किडनी से ग्रसित नही मिला। इसी तरह एक मरीज जिन्हें अनियंत्रित उच्च रक्तचाप होने के कारण उनका किडनी खराब है। जिसके लिए वह महासमुंद जिला चिकित्सालय से डायलिसिस करा रहा है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के टीम ने प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल के विद्यार्थियों का दंत परीक्षण किया। जिसमें किसी भी बच्चे में फ्लोराइड युक्त पानी पीने का लक्षण नहीं मिला। स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी के अन्य संभावित कारणों की भी जांच की जा रही है। ताकि ग्रामीणों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।




