भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की सच्ची मित्रता, निस्वार्थ प्रेम व भक्ति का संदेश दिया
ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया
थानखम्हरिया :- खमरिया समीप ग्राम लोधीकापा में स्वर्गीय राजेंद्र वर्मा जी के वार्षिक श्राद्ध के अवसर पर आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास पीठ से महंत श्री गोपाल शरण देवाचार्य महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण एवं उनके परम मित्र सुदामा के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा के दौरान महंत श्री गोपाल शरण देवाचार्य महाराज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता सच्चे प्रेम, त्याग और समर्पण की मिसाल है। उन्होंने कहा कि सुदामा अत्यंत निर्धन थे, किंतु उनके हृदय में भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति थी। पत्नी के आग्रह पर सुदामा अपने बाल सखा भगवान श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। उनके पास भेंट स्वरूप देने के लिए केवल चावल (पोहे) थे, जिसे भी वे संकोचवश छिपाकर ले गए थे।
महाराज श्री ने कहा कि जब सुदामा द्वारका पहुंचे तो भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र का अत्यंत आदर-सम्मान किया। स्वयं द्वार पर जाकर उनका स्वागत किया, चरण पखारे और राजसी वैभव के बीच भी मित्रता का सर्वोच्च आदर्श प्रस्तुत किया। भगवान ने सुदामा द्वारा लाए गए साधारण चावल को बड़े प्रेम से ग्रहण किया और बिना कुछ मांगे ही उनके जीवन के सारे कष्ट दूर कर दिए।
उन्होंने कहा कि यह प्रसंग हमें सिखाता है कि भगवान को धन-दौलत नहीं, बल्कि सच्ची भक्ति, निष्कपट प्रेम और समर्पण प्रिय है। जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से ईश्वर का स्मरण करता है, उसके जीवन में भगवान स्वयं कृपा बरसाते हैं।

कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर दिलीप कुमार, कृष्ण कुमार वर्मा, प्राचार्य सोनू पटेल, होलेश्वर पटेल, नायब तहसीलदार गोपाल, रोशनी पटेल, संतोष मंजू, भागवत पुष्पा, बादल, दीपक पटेल, सूर्यप्रकाश, डॉ. पवन, डॉ. ज्योति वर्मा, राजू, अर्जुन वर्मा, नारायण वर्मा, कौशिल्या, इंदिरा, अमेरिका, सहोद्रा, सावित्री, शारदा, कन्हैया, मंदाकिनी, प्रमिला, पदमा, मोतीलाल, पीलू सिंह, महेश, राधे यादव, रामरतन, ईश्वर सिन्हा, शेखर, त्रिलोकी यादव, मालिक निषाद, हरिदास सहित ग्रामवासी एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।





