सोलह श्रृंगार कर महिलाओं ने मांगा अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु का आशीर्वाद
थान खम्हरिया। नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में सुहागिन महिलाओं ने श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ वट सावित्री व्रत एवं पूजा संपन्न की। पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर महिलाओं ने पूरे विधि-विधान के साथ वटवृक्ष की पूजा-अर्चना की।
सुबह से ही नगर के विभिन्न वार्डों की सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर समूह में वटवृक्ष के पास पहुंचने लगीं। पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों से सजी महिलाओं ने वटवृक्ष की परिक्रमा कर पूजा की तथा पति की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि और सभी सदस्यों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
पूजन के दौरान महिलाओं ने वटवृक्ष के चारों ओर धागा बांधकर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किया और वट सावित्री कथा का श्रवण किया। महिलाओं ने ईश्वर से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और निरोगी जीवन का आशीर्वाद मांगा।
नगर में सामाजिक रूप से मनाए गए इस पर्व में नवविवाहित महिलाओं में भी विशेष उत्साह देखने को मिला। पहली बार वट सावित्री व्रत रखने वाली महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार सज-धज कर पूजा-अर्चना की।
इस अवसर पर महंत वसंत दास वैष्णव ने कहा कि हिंदू धर्म में प्रकृति पूजा का विशेष महत्व है। वटवृक्ष को दीर्घायु, स्थिरता और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने कहा कि जिस घर में नारी का सम्मान होता है, वहां सदैव सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास रहता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प, तप और सच्चे प्रेम के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती आ रही हैं।
वट सावित्री पूजा के अवसर पर नगर में धार्मिक एवं आध्यात्मिक माहौल बना रहा। महिलाओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा कर अपने परिवार की मंगलकामना की।




