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पुरुषोत्तम मास धर्म, कर्म और आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत उत्तम : महंत बसंत दास

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अधिक मास में जप, तप, दान और व्रत का कई गुना मिलता है पुण्य फल

थान खमरिया। हिंदू धर्म में पुरुषोत्तम मास, जिसे अधिक मास या मलमास भी कहा जाता है, आध्यात्मिक साधना, दान-पुण्य और आत्मशुद्धि के लिए सबसे पवित्र एवं उत्तम महीना माना जाता है। इस संबंध में जानकारी देते हुए महंत बसंत दास ने बताया कि पुरुषोत्तम मास का विशेष महत्व है, क्योंकि इस माह में किए गए छोटे-छोटे पुण्य कार्य, जप, तप और व्रत भी कई गुना अधिक फलदायी होते हैं तथा पुराने कर्मों के प्रभाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं।
महंत बसंत दास ने कहा कि मान्यता है, इस मास में जो व्यक्ति सच्चे मन से श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करता है या भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करता है, उस पर विशेष कृपा बनी रहती है। इस दौरान किए गए धार्मिक अनुष्ठान, दान-पुण्य और उपवास से व्यक्ति के इस जन्म एवं पूर्व जन्मों के पाप भी क्षीण होते हैं।
उन्होंने बताया कि पुरुषोत्तम मास में तामसिक भोजन, मांसाहार, मद्यपान, प्याज-लहसुन का सेवन, असत्य बोलना एवं किसी का अनादर करने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के वरदान से ही मलमास को पुरुषोत्तम मास का दर्जा प्राप्त हुआ। इसी कारण इस पूरे माह भगवान विष्णु का ध्यान, पूजन, मंत्र जाप एवं कथा-श्रवण अत्यंत शुभ माना जाता है।
महंत बसंत दास ने आगे कहा कि यह पवित्र मास धर्म और कर्म के लिए अत्यंत उत्तम समय है। इस अवधि में श्रद्धा और भक्ति के साथ किए गए शुभ कार्यों का कई गुना पुण्य प्राप्त होता है, जिससे व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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