‘करवा देंगे नहीं… करवा दीजिए’, जवाब से ज्यादा वायरल हुई उसकी बेबाकी
’50 रुपये में क्या होता है?’ बच्चे के सवाल ने अफसरों को कर दिया निरुत्तर
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद अधिकारियों को भी कुछ पल के लिए निरुत्तर कर दिया। शिकायतों की लंबी कतार के बीच जब 13 वर्षीय अमिताभ गुप्ता अपनी अर्जी लेकर जिलाधिकारी के सामने पहुंचा, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मिनटों में उसकी बातें पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर देंगी। इस बातचीत का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
आठवीं कक्षा में पढ़ने वाला अमिताभ गुप्ता अकेले ही संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंचा था। जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने जब उससे पूछा कि क्या वह अकेला आया है, तो उसने सहजता से “हां” में जवाब दिया। इसके बाद उसने अपने परिवार की ऐसी कहानी सुनाई, जिसने वहां मौजूद अधिकारियों को गंभीर होने पर मजबूर कर दिया।
अमिताभ ने बताया कि उसके पिता मानसिक रूप से बीमार हैं और मां घरों में काम करके किसी तरह परिवार का खर्च उठाती हैं। परिवार जिस मकान में रहता है, उसके एक हिस्से पर रिश्तेदारी में ताई ने ताला लगा रखा है। इसी विवाद को सुलझाने के लिए वह पहले भी कई बार अधिकारियों के पास जा चुका है। उसने बताया कि पूर्व जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के समय भी शिकायत की थी और आदेश भी मिला था, लेकिन उसके अनुसार आज तक ताला नहीं खुला। बच्चे की बात सुनने के बाद वहां मौजूद एक पुलिस अधिकारी ने आश्वासन दिया कि उसका काम करवा दिया जाएगा। लेकिन अमिताभ का जवाब पूरे हॉल में गूंज गया। उसने तुरंत कहा, “करवा देंगे नहीं…करवा दीजिए। आप लोग हर बार यही कहते हैं, लेकिन ताला कभी नहीं खुलता।” उसकी बेबाक टिप्पणी सुनकर कई अधिकारी मुस्कुराते नजर आए, लेकिन बच्चा अपनी बात पूरी गंभीरता से रखता रहा।
जिलाधिकारी ने माहौल हल्का करने की कोशिश करते हुए कहा कि इस उम्र में उसे पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन अमिताभ का अगला जवाब और भी ज्यादा मार्मिक था। उसने कहा, “आप अपनी सैलरी से हमें पढ़ाएंगे नहीं। पढ़ाई के लिए पैसे चाहिए। हमारी मम्मी रोज 50 रुपये की सब्जी लाती हैं। आजकल 50 रुपये में क्या होता है?” यह सिर्फ एक जवाब नहीं था, बल्कि उस परिवार की आर्थिक मजबूरी की तस्वीर थी, जहां पढ़ाई से पहले दो वक्त की रोटी का इंतजाम बड़ी चुनौती है। बच्चे ने बताया कि उसकी मां की मासिक आय करीब तीन हजार रुपये है। इसी कमाई से घर का खर्च भी चलता है और बच्चों की पढ़ाई भी। उसका कहना था कि जब घर की बुनियादी समस्या ही खत्म नहीं होगी, तो पढ़ाई पर ध्यान कैसे लगाया जा सकता है।
बातचीत के दौरान अमिताभ ने एक और ऐसी बात कह दी, जिसने वहां मौजूद अधिकारियों को असहज कर दिया। पुलिस अधिकारियों की ओर देखते हुए उसने कहा, “आप लोगों को तो बस थोड़ा कमीशन दे दो, काम हो जाता है।” इस टिप्पणी पर कुछ अधिकारी मुस्कुरा दिए, लेकिन जिलाधिकारी ने तुरंत बच्चे को टोका और कहा कि ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए, क्योंकि इससे सामने वाले को बुरा लग सकता है। हालांकि अमिताभ अपनी बात पर कायम रहा। उसका कहना था कि वह कई बार शिकायत कर चुका है, लेकिन उसकी समस्या जस की तस बनी हुई है। उसके लिए पढ़ाई से पहले घर का विवाद खत्म होना जरूरी है।
बाद में मीडिया से बातचीत में अमिताभ ने बताया कि उसकी मां भी कई बार प्रशासन से गुहार लगा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय पुलिस उसके घर पहुंची और परिवार से बातचीत की। अमिताभ की मां ने बताया कि बेटे ने उनसे कहा था कि वह स्कूल जाकर ट्रांसफर सर्टिफिकेट लेने जा रहा है, लेकिन वह सीधे संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंच गया। उन्होंने कहा कि परिवार लंबे समय से आर्थिक संकट में है। पति मानसिक रूप से बीमार हैं और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है। उन्हें उम्मीद है कि अब प्रशासन उनके मकान विवाद का समाधान करेगा।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोग अमिताभ की साफगोई और हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस उम्र में बच्चे खेल और पढ़ाई में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में अमिताभ अपने परिवार के अधिकारों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर है। यह घटना केवल एक बच्चे की शिकायत भर नहीं है। यह उस सामाजिक और प्रशासनिक हकीकत की झलक भी है, जहां कई बार वर्षों से लंबित समस्याओं पर उतना असर नहीं होता, जितना एक वायरल वीडियो का हो जाता है। अमिताभ की बेबाक आवाज ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आम लोगों की शिकायतें सुनी जाने के लिए उन्हें भी वायरल होना जरूरी है?




