ब्यूरो चीफ : अनिल सिंघानिया
थानखम्हरिया, स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर में बुधवार को गुरुपूर्णिमा उत्सव श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिवार ने सद्गुरुदेव पं. संतोषी लाल पाराशर का पूजन एवं भव्य स्वागत किया। साथ ही विद्यालय के आचार्यों एवं दीदियों का श्रीफल, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-भेंट देकर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों एवं विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के सदस्यों ने दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान ॐ, भारत माता एवं मां सरस्वती के छायाचित्रों के समक्ष पूजा-अर्चना से किया। इसके पश्चात समिति सदस्यों ने अतिथियों का शॉल, श्रीफल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।

विद्यालय के भैया-बहनों ने गुरु महिमा पर आधारित भजनों की मनमोहक प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया।
अपने उद्बोधन में सद्गुरुदेव पं. संतोषी लाल पाराशर ने कहा कि मनुष्य चाहे कितना भी बड़ा ज्ञानी, तपस्वी या विद्वान क्यों न हो, यदि वह गुरु भक्ति से रहित है तो उसका ज्ञान अधूरा और व्यर्थ है। उन्होंने कहा कि गुरु सदैव अपने शिष्यों के कल्याण की भावना रखते हैं और उन्हें जीवन में आगे बढ़ते देखकर प्रसन्न होते हैं। गुरु ही शिष्य के जीवन से अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर सही मार्ग का प्रकाश प्रदान करते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, विनम्रता एवं बड़ों के सम्मान का महत्व बताते हुए कहा कि इन गुणों से ही जीवन में सफलता प्राप्त होती है। बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करने से धन, बल, आयु एवं यश में वृद्धि होती है।
सेवानिवृत्त बीईओ प्रहलाद दास वैष्णव ने कहा कि मानव जीवन में गुरु का वरण अत्यंत आवश्यक है। गुरु के मार्गदर्शन के बिना जीव का कल्याण संभव नहीं है।
कार्यक्रम के अंत में व्यवस्थापक राकेश जोशी ने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर समिति सदस्य सुरेश सिंघानिया, पुरुषोत्तम अग्रवाल, निखिल अग्रवाल, पुरुषोत्तम सिंघानिया, रौनक अग्रवाल, मोहन शर्मा तथा विद्यालय के प्राचार्य लखन लाल साहू सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, अभिभावक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।




