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भारतमाला मुआवजा घोटाले पर ED का बड़ा शिकंजा: 12.78 करोड़ की 62 संपत्तियां कुर्क; 14 के खिलाफ कोर्ट में शिकायत

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भारतमाला परियोजना के भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में ईडी ने 12.78 करोड़ रुपये की 62 संपत्तियां कुर्क की हैं। जांच एजेंसी ने 14 आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में अतिरिक्त अभियोजन शिकायत भी दाखिल की है।

रायपुर-विशाखापत्तनम राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण में हुए कथित मुआवजा घोटाले की जांच तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 12.78 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां कुर्क करते हुए 14 लोगों के खिलाफ विशेष अदालत में अतिरिक्त अभियोजन शिकायत भी दाखिल की है।

भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में ईडी ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत 12.78 करोड़ रुपये मूल्य की 62 संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। कुर्क की गई संपत्तियों में जमीन, भवनों के अलावा करीब 4.69 करोड़ रुपये के शेयर और म्यूचुअल फंड निवेश भी शामिल हैं। ईडी ने 31 जुलाई 2026 को प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी करते हुए यह कार्रवाई की। एजेंसी का दावा है कि ये संपत्तियां भूमि अधिग्रहण मुआवजे में कथित अनियमितताओं से अर्जित अवैध धन से खरीदी गई थीं।
इस मामले में ईडी ने जय प्रकाश गांधी सहित 14 लोगों के खिलाफ रायपुर स्थित विशेष अदालत में अतिरिक्त अभियोजन शिकायत भी दायर की है। जांच एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त मुआवजा हासिल किया और बाद में उस रकम को अलग-अलग वित्तीय निवेशों और संपत्तियों में लगाया।

जांच की शुरुआत आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) और एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई थी। जांच में सामने आया कि अधिसूचना जारी होने के बाद जमीन खरीदकर उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा गया, ताकि मुआवजे की राशि कई गुना बढ़ाई जा सके। इसके लिए परिवार के सदस्यों के नाम पर बिक्री और दान पत्रों का भी इस्तेमाल किया गया।

ईडी के मुताबिक, जय प्रकाश गांधी और उनके परिवार को जहां करीब 56.76 लाख रुपये का वैध मुआवजा मिलना था, वहीं उन्हें लगभग 9.83 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ। एजेंसी का दावा है कि इस प्रक्रिया से करीब 9.27 करोड़ रुपये का अवैध लाभ अर्जित किया गया। जांच में एक अन्य मामले में उमा तिवारी पर भी फर्जी राजस्व दस्तावेजों के आधार पर खुद को भूमि स्वामी की दत्तक पुत्री बताकर करीब 2.13 करोड़ रुपये का मुआवजा लेने का आरोप है।

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