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श्रीमद् भागवत कथा में सती चरित्र एवं भगवान शंकर-पार्वती विवाह प्रसंग पर झूमे श्रद्धालु

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श्रद्धा जितनी मजबूत होगी, उतना ही विश्वास का आकर्षण करेगी — आचार्य सुमित भारद्वाज

ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया

थान खमरिया। रामजीलाल जगदीश प्रसाद भवन में मातृशक्ति महिला मंडल के तत्वाधान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में प्रखर कथा वाचक आचार्य सुमित भारद्वाज ने सती चरित्र एवं भगवान शंकर-पार्वती विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग पर श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे।

आचार्य सुमित भारद्वाज ने सती चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि माता सती के पिता राजा दक्ष ने विशाल यज्ञ का आयोजन किया था, लेकिन उन्होंने अपने दामाद भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया। जब माता सती को इस बात का पता चला तो उन्हें अत्यंत दुख हुआ और उन्होंने भगवान शिव से यज्ञ में जाने की अनुमति मांगी। भगवान शिव ने बिना निमंत्रण जाने से होने वाले अपमान की बात कहते हुए उन्हें जाने से मना किया, लेकिन माता सती नहीं मानीं और पिता दक्ष के यज्ञ में पहुंच गईं।

 

यज्ञ स्थल पर भगवान शिव के प्रति अपने पिता एवं अन्य लोगों का अपमानजनक व्यवहार देखकर माता सती अत्यंत व्यथित हुईं। उन्होंने अपने पति भगवान शिव का अपमान सहन न करते हुए यज्ञ की अग्नि में स्वयं को समर्पित कर दिया। यह समाचार भगवान शिव को मिला तो वे अत्यंत क्रोधित हुए और उनके क्रोध से वीरभद्र का प्राकट्य हुआ, जिसने राजा दक्ष के यज्ञ का विध्वंस कर दिया। भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर विचरण करने लगे। तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के अंगों को अलग किया। मान्यता है कि जहां-जहां माता सती के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठ स्थापित हुए।

कथा के दौरान आचार्य जी ने कहा कि “श्रद्धा जितनी मजबूत होगी, उतना ही विश्वास का आकर्षण करेगी।” उन्होंने कहा कि माता पार्वती श्रद्धा की प्रतीक हैं और भगवान शिव विश्वास के प्रतीक हैं। जब जीवन में श्रद्धा और विश्वास का मजबूत मेल होता है, तब विवेक रूपी गणेश का जन्म होता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में कितनी भी प्रतिकूल परिस्थितियां अथवा संकट क्यों न आएं, भगवान की कृपा सदैव जीव को संभालती है। इसलिए जीवन में श्रद्धा और विश्वास का अटूट मेल बनाए रखना चाहिए।

कथा के दौरान देशप्रेम एवं सनातन धर्म के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। भगवान शंकर एवं माता पार्वती के विवाह प्रसंग के दौरान संगीतकारों ने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी, जिस पर मातृशक्ति सहित बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे और नृत्य करने लगे।

कथा के समापन पर पूजा-अर्चना एवं आरती की गई, जिसके पश्चात प्रसाद वितरण किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।

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