ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया
थानखम्हरिया। नगर के रामजीलाल जगदीश प्रसाद भवन में पिछले सात दिनों से चल रही श्रीमद्भागवत कथा का समापन श्रद्धा एवं भक्तिमय वातावरण में हुआ। कथा के अंतिम दिन तुलसी वर्षा का आयोजन किया गया। इसके पश्चात हवन-पूजन एवं धार्मिक अनुष्ठान के साथ कथा का विधिवत समापन हुआ।
इस अवसर पर कथा व्यास आचार्य सुमित भारद्वाज ने तुलसी के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन धर्म में तुलसी को साक्षात देवी लक्ष्मी का स्वरूप तथा भगवान विष्णु की प्रिय माना गया है। तुलसी की पूजा-अर्चना से घर में सुख, शांति एवं समृद्धि आती है। भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण एवं शालिग्राम की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व है और इसके बिना पूजा को पूर्ण नहीं माना जाता। कार्तिक मास में तुलसी विवाह की परंपरा भी सनातन धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखती है।

कथा के अंतिम दिवस तुलसी वर्षा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से सहभागिता की। आचार्य सुमित भारद्वाज ने नगर एवं क्षेत्रवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। कथा के दौरान पूरे आठ दिनों तक रामजीलाल जगदीश प्रसाद भवन में भक्तिमय वातावरण बना रहा। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे और भगवान की भक्ति में लीन रहे।
आयोजन को सफल बनाने में मातृशक्ति महिला मंडल की महिलाओं का विशेष योगदान रहा। सुषमा अग्रवाल, ज्योति सिंघानिया, सीमा सिंघानिया, रीना सिंघानिया, अभिलाषा अग्रवाल, चंचल सिंघानिया, अन्नू अग्रवाल, मनीषा सिंघानिया, शारदा अग्रवाल, सरस्वती सिंघानिया, धनपति देवी, किरण अग्रवाल सहित अन्य महिलाओं की सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग रहा।
समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने कथा व्यास आचार्य सुमित भारद्वाज के प्रति आभार व्यक्त किया तथा आयोजन को सफल बनाने में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं एवं मातृशक्ति महिला मंडल के सदस्यों का धन्यवाद किया।




