तीन पीढ़ियों से मिट्टी की गणेश प्रतिमा बना रहा कुंभकार परिवार, पर्यावरण हितैषी प्रतिमाओं की बढ़ी मांग
ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया
थान खमरिया। गणेश उत्सव का पर्व नजदीक आते ही नगर के कुंभकार समाज में रौनक बढ़ गई है। कुंभकार समाज के मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर भगवान श्रीगणेश की मिट्टी से निर्मित प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने और उन्हें आकर्षक ढंग से सजाने-संवारने में जुटे हुए हैं। यह समय उनके लिए सालभर की मेहनत को आकार देने और ग्राहकों के आर्डर पूरे करने का होता है।
नगर के कुंभकार पारा में पिछले तीन पीढ़ियों से मिट्टी से भगवान श्रीगणेश की प्रतिमाएं बनाने का कार्य किया जा रहा है। गणेश उत्सव के बाद यही परिवार दुर्गा प्रतिमाओं के निर्माण में जुट जाएगा। खास बात यह है कि यहां मुख्य रूप से मिट्टी से निर्मित गणेश प्रतिमाओं की ही बिक्री की जाती है।
मूर्तिकार दौवा कुंभकार ने बताया कि उन्हें पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) की प्रतिमाओं से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान की जानकारी पहले से है। उन्होंने बताया कि मिट्टी की प्रतिमा बनाने में काफी मेहनत और समय लगता है। प्रतिमा निर्माण के लिए विशेष स्थान से मिट्टी लाकर उसे पहले छानकर साफ किया जाता है। इसके बाद पानी मिलाकर मिट्टी को अच्छी तरह गूंथा जाता है। मिट्टी ठीक तरह से तैयार नहीं होने पर प्रतिमा में दरार आने की आशंका रहती है।

उन्होंने बताया कि अधिक मेहनत और समय लगने के कारण मिट्टी से बनी प्रतिमाओं की कीमत अपेक्षाकृत अधिक होती है, लेकिन मिट्टी की प्रतिमाओं को पूजा के लिए शुभ एवं पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है। यही कारण है कि प्रतिवर्ष मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं की मांग बढ़ती जा रही है। नगर एवं आसपास के क्षेत्र में करीब 500 गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की जाती है। ग्राहकों के आर्डर समय पर पूरे करने के लिए गणेश चतुर्थी से लगभग दो माह पहले ही प्रतिमा निर्माण का काम शुरू कर दिया जाता है।
पैतृक व्यवसाय पर निर्भर हैं 60 परिवार
कुंभकार पारा में कुंभकार समाज के लगभग 60 परिवार निवास करते हैं। समाज के अधिकांश परिवार आज भी अपने पुश्तैनी मिट्टी कला व्यवसाय पर निर्भर हैं। समय-समय पर शासकीय योजनाओं का लाभ भी समाज के लोगों को मिलता है, लेकिन अभी तक समाज का कोई परिवार शासकीय नौकरी में नहीं है।
कुंभकार समाज की महिलाएं और बच्चे भी इस पारंपरिक व्यवसाय में परिवार का सहयोग करते हैं। वे बाजार में दुकानें लगाकर मिट्टी से निर्मित विभिन्न सामग्री एवं प्रतिमाओं की बिक्री करते हैं। बदलते दौर के बावजूद कुंभकार समाज की नई पीढ़ी भी अपने पुश्तैनी हुनर को आगे बढ़ाने में जुटी है।




