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25 करोड़ बच्चों के सपनों को भारत-हर बच्चों को अवसर, हर सपनों को उड़ान: विकसित भारत का संकल्प

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सेवा संकल्प अभियान

 

 

• ओम प्रकाश डहरिया
सहायक जनसम्पर्क अधिकारी
रायपुर,

किसी बच्चे की आंखों में देखें तो वहां केवल बचपन नहीं दिखाई देगा, बल्कि वहां आने वाले भारत की तस्वीर दिखाई देगी। किसी की आंखों में अंतरिक्ष तक पहुंचने का सपना है, कोई डॉक्टर बनकर गांव के लोगों की सेवा करना चाहता है, कोई वैज्ञानिक बनकर नई खोज करना चाहता है, तो कोई अपने गांव में ऐसा काम करना चाहता है जिससे उसके साथ दूसरे लोगों को भी रोजगार का अवसर मिले और भविष्य सुनिश्चित हो सके। वहीं किसी बच्चे का सपना खेल के मैदान से जुड़ा है तो किसी का खेत, तकनीक, शिक्षा, कला या उद्यमिता से। भारत के करोड़ों बच्चों की आंखों में पल रहे यही अनगिनत सपने मिलकर वर्ष 2047 के विकसित भारत की नींव रख रहे हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा और राष्ट्रनिर्माण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’ की दूसरी पहल ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ इसी भविष्य को समझने और उसे आकार देने का संकल्प है। यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि उस पीढ़ी के प्रति विश्वास का संदेश है, जो वर्ष 2047 में विकसित भारत की जिम्मेदारी संभालेगी। आज जो बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं, वही कल भारत के वैज्ञानिक, चिकित्सक, इंजीनियर, शिक्षक, सैनिक, खिलाड़ी, उद्यमी, शोधकर्ता और नीति-निर्माता होंगे।

विकसित भारत की यात्रा की शुरुआत इसलिए स्कूल की कक्षा से होती है। एक बच्चे के हाथ में किताब होती है, लेकिन उसी किताब के पन्नों में उसके भविष्य की पूरी दुनिया छिपी होती है। शिक्षा को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित रखने के बजाय बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, कौशल, तकनीकी समझ और नवाचार की भावना विकसित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयास आने वाले भारत की तस्वीर बदल रहे हैं। पीएम श्री स्कूल इसी बदलती सोच का उदाहरण हैं, जहां विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ प्रयोग, खेल, कला, तकनीक और अनुभव के माध्यम से सीखने का वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

लेकिन भारत के सपनों की असली ताकत तब सामने आएगी, जब विकास की रोशनी उन बच्चों तक भी पहुंचेगी, जिनके घर दूरस्थ गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों और वनांचलों में हैं। छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय बहुल राज्य में यह जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। एकलव्य आवासीय विद्यालयों ने जनजातीय समाज के अनेक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए अवसर दिए हैं। जिन बच्चों के लिए कभी बड़े शहरों में जाकर पढ़ाई करना दूर का सपना था, उनके लिए आवासीय विद्यालय शिक्षा और बेहतर भविष्य की नई राह बन रहे हैं।

इन विद्यालयों की कक्षाओं में बैठा कोई बच्चा जब पहली बार बड़े लक्ष्य के बारे में सोचता है, तो उसके साथ केवल उसका अपना सपना नहीं होता। उसके पीछे माता-पिता की उम्मीदें होती हैं, परिवार की वर्षों पुरानी आकांक्षाएं होती हैं और पूरे समाज की बदलती तस्वीर होती है। एक बच्चे की सफलता उसके परिवार को यह विश्वास देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, प्रतिभा को अवसर मिले तो मंजिल हासिल की जा सकती है।

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रयास आवासीय विद्यालय भी विद्यार्थियों के सपनों को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं। स्कूली शिक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर और दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों के सामने उच्च शिक्षा के नए रास्ते खुल रहे हैं। जेईई, नीट, क्लैट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन और तैयारी का वातावरण इन विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने का आत्मविश्वास देता है। यह बदलाव केवल शिक्षा व्यवस्था का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह उस सोच का विस्तार है जिसमें बच्चे की प्रतिभा को उसके गांव, परिवार या आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसकी क्षमता और मेहनत से पहचाना जाता है।

वर्ष 2047 के भारत की तस्वीर केवल ऊंची इमारतों, आधुनिक शहरों और नई तकनीकों से नहीं बनेगी। उसकी असली पहचान उस बच्चे के आत्मविश्वास से होगी, जो कह सके कि मैं अपने सपने को पूरा कर सकता हूं। विकसित भारत का अर्थ तब और व्यापक होगा, जब देश का युवा रोजगार की तलाश करने के स…

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