भारत का पहला बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट | 508 km कॉरिडोर
भारत का पहला हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, सिविल कार्यों, ट्रैक बिछाने, विद्युतीकरण, पुलों, सुरंगों, डिपो और स्टेशन विकास के क्षेत्रों में लगातार प्रगति कर रहा है।
🚧 प्रोजेक्ट की प्रगति | सितंबर 2026
▪️ 456 km पियर (खंभों) का काम पूरा
▪️ 371 km वायाडक्ट (ऊंचे पुल) का निर्माण पूरा
▪️ 299 km के हिस्से में 6 लाख नॉइज़ बैरियर (शोर रोकने वाले अवरोधक) लगाए गए
▪️ 206 km वायाडक्ट पर 9,300 OHE मास्ट (बिजली के खंभे) लगाए गए
▪️ 4 पहाड़ी सुरंगों की खुदाई पूरी
▪️ 21 km लंबी सुरंग के हिस्से के रूप में 5 km NATM सेक्शन की खुदाई पूरी
▪️ सभी 3 रोलिंग स्टॉक डिपो (गुजरात में साबरमती और सूरत, तथा महाराष्ट्र में ठाणे) में काम चल रहा है
8 स्टेशनों पर सिविल कार्य पूरा हो चुका है। आर्किटेक्चरल फिनिशिंग का काम जारी है।
🚄 मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट भारत में विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर लाकर, आवागमन के भविष्य को एक नई दिशा दे रहा है।
📍 प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं
🔹 मुंबई (BKC) स्टेशन: इसे जमीन के नीचे लगभग 10 मंजिल गहरा बनाया जा रहा है। इसके प्लेटफॉर्म जमीन से 24 मीटर नीचे होंगे और यहाँ 6 प्लेटफॉर्म ऐसे डिज़ाइन किए गए हैं, जहाँ 16-कोच वाली ट्रेनें आ सकेंगी।
🔹 अंडरग्राउंड सुरंग: इस कॉरिडोर का शुरुआती 21 km हिस्सा जमीन के नीचे है, जिसमें ठाणे क्रीक के नीचे 7 km लंबी सुरंग भी शामिल है – जो भारत की पहली समुद्र के नीचे (अंडरसी) रेल सुरंग होगी।
🔹 एलिवेटेड कॉरिडोर: यह रूट शिलफाटा के पास से ऊपर उठता है और गुजरात की ओर ज्यादातर ऊंचे पुलों (वायाडक्ट) से होकर गुजरता है।
🔹 वायाडक्ट निर्माण: इस कॉरिडोर में 40 मीटर के स्टैंडर्ड स्पैन का इस्तेमाल किया गया है, और वायाडक्ट डेक के ऊपर ‘बैलास्टलेस स्लैब ट्रैक’ (बिना गिट्टी वाला ट्रैक) लगाने की योजना है।
🔹 नदियों को पार करना: यह कॉरिडोर मुंबई और साबरमती के बीच 25 नदियों और खाड़ियों (creeks) को पार करता है।
🔹 सूरत स्टेशन और डिपो: सूरत स्टेशन को ‘हीरे’ (डायमंड) की थीम पर विकसित किया जा रहा है, जहाँ मेट्रो, BRTS और हाईवे से कनेक्टिविटी मिलेगी। सूरत में एक रोलिंग स्टॉक डिपो भी बनाया जा रहा है।
🔹 वडोदरा स्टेशन: इसे मौजूदा भारतीय रेलवे स्टेशन के ठीक बगल में बनाया जा रहा है, ताकि यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।
🔹 अहमदाबाद सेक्शन: मौजूदा रेलवे लाइनों, सड़कों और घनी आबादी वाले इलाकों के ऊपर एलिवेटेड वायडक्ट (ऊंचे पुल) बनाए जा रहे हैं।
🔹 साबरमती नदी पुल: इसमें ‘बैलेंस्ड कैंटिलीवर’ स्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें वायडक्ट नदी तल से 36 मीटर की ऊंचाई पर है।
🔹 साबरमती मल्टीमॉडल हब: इसे इस तरह विकसित किया जा रहा है कि यहां बुलेट ट्रेन, सबअर्बन रेल, मेट्रो और BRTS सेवाओं को एक साथ जोड़ा जा सके।
📊 प्रोजेक्ट पर एक नज़र
▪️ कॉरिडोर की कुल लंबाई: 508 किमी
▪️ कॉरिडोर में स्टेशनों की संख्या: 12
▪️ अंडरग्राउंड (भूमिगत) सेक्शन: 21 किमी
▪️ ठाणे क्रीक के नीचे सुरंग: 7 किमी
▪️ BKC स्टेशन पर ट्रेन की क्षमता: 16 कोच
🎯 भविष्य का विज़न
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक 7,000 किमी का हाई-स्पीड रेल नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य रखा है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट इस विज़न की दिशा में एक बड़ा कदम है।




