थानखम्हरिया। वर्ष के साढ़े तीन अक्षय मुहुर्त में एक अक्षय तृतीया भी शामिल है। यह तिथि बहुत शुभ है पंचांग देखे बिना कोई भी शुभ कार्य या शुभारंभ करने के लिये श्रेष्ठ है। शास्त्रों के अनुसार यह दिन स्वयंसिद्ध है। पाटेश्वरधाम के ऑनलाईन सतसंग में संत श्रीरामबालकदास जी ने कहा कि वर्ष में साढ़े तीन अक्षय मुहुर्त होते हैं चैत्र शुक्ल एकम् नववर्ष, कुवाॅर की विजयादशमी, अक्षय तृतीया और दीपावली का आधा दिन। विवाह, सोना खरीदना, गृह प्रवेश, वाहन खरीदना, पदभार ग्रहण करना, भूमिपूजन, नया व्यापार प्रारंभ करना इस दिन बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन जिनका परिणय संस्कार होता है उनका सौभाग्य अखण्ड रहता है। महालक्ष्मी की प्रसन्नता के लिये भी इस दिन अनुष्ठान किया जाता है। सतयुग और त्रेतायुग का शुभारंभ भी अक्षय तृतीया को हुआ था। श्री हरि के नर – नारायण, परशुराम, हयग्रीव अवतार इसी दिन हुये थे। बद्रीनाथधाम के कपाट आज ही खुलते हैं। वृंदावन में बांकेबिहारी के चरणों के वर्ष में एक बार दर्शन अक्षय तृतीया को ही होते हैं। कौरव – पाण्डव के बीच हुये महायुद्ध का विराम अक्षय तृतीया को ही हुआ था। बाबाजी ने कहा आज के दिन किया जाने वाला कार्य सिद्ध और अक्षय हो जाता है।



