रायपुर. कोर्ट के आदेश के बाद सेवाएं समाप्त किए गए कर्मचारी को बैक डोर लाने के प्रयास का विरोध शुरू हो गया है. यह मामला कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय रायपुर का है, जहां बर्खास्त प्रो. शाहिद अली और संजय द्विवेदी को क्लीन चिट देने के लिए उठाए जाने वाले कदम पर सवाल उठ रहे हैं. चंडीगढ़ के डॉ. आशुतोष मिश्रा की शिकायत पर राष्ट्रपति सचिवालय ने मामले को मुख्य सचिव के पास भेजा है.
बता दें कि क्लर्क रैंक के विश्विद्यालय कर्मचारी आकाश चंद्रवंशी ने बर्खास्त प्रो. शाहिद अली और संजय द्विवेदी के मामले में फिर से विचार करने रजिस्ट्रार को पत्र लिखा था. इस पर चंडीगढ़ के डॉ. आशुतोष मिश्रा ने आपत्ति जताई है और 29 मई 2025 को पत्र लिख कर इसे उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के नोटिस में लाया है. उनके पत्र का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रपति सचिवालय ने उसी दिन मुख्य सचिव को मामला ईमेल के जरिए जांच के लिए भेजा है.
एक के पत्र के आधार पर इस मामले को 20 मई 2025 को विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की बैठक में लाया गया था. डॉ. आशुतोष मिश्रा ने अधिकारियों से आग्रह किया है कि आकाश चंद्रवंशी के इस कदम, भाषा, प्रस्ताव और पत्र की जांच की जाए. उन्होंने कहा कि शाहिद अली का मामला पहले ही सुप्रीम कोर्ट में तय हो चुका है. सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय पर कानूनी राय लेने के बाद विश्वविद्यालय ने उन्हें बर्खास्त कर दिया. इस कार्यवाही को पहले ही कार्यकारिणी परिषद द्वारा अनुमोदित किया जा चुका है. फिर इसे पिछले दरवाजे से कैसे और क्यों आगे बढ़ाया जा रहा है.




