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मारुति वाहन दुर्घटना मामले में रायगढ़ उपभोक्ता आयोग का फैसला, बीमा कंपनी को क्षतिपूर्ति का आदेश

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रायगढ़ उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मारुति इको वाहन दुर्घटना के बीमा दावे में रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कमी का दोषी ठहराया। परिवादी राकेश कुर्रे के वाहन की दुर्घटना के बाद बीमा कंपनी ने दावा अस्वीकार कर दिया था।

 रायगढ़ – बीमा अवधि के दौरान मारुति वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने पर रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा बीमा दावा भुगतान में आनाकानी करने के मामले में उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, रायगढ़ ने बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए परिवादी को क्षतिपूर्ति और वाद व्यय के रूप में लगभग सवा लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश जारी किया है।

परिवादी राकेश कुर्रे, होटल व्यवसायी, निवासी कापू, धरमजयगढ़, ने अपने स्वामित्व वाले मारुति इको मॉडल 2021 (वाहन क्रमांक CG 13 AQ 6509) का बीमा रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, शाखा रायपुर से करवाया था। बीमा पॉलिसी 22 दिसंबर 2021 से 21 दिसंबर 2024 तक वैध थी, जिसके लिए प्रीमियम का भुगतान किया गया था। बीमा अवधि के दौरान दुर्घटना की स्थिति में दायित्व बीमा कंपनी का था।

9 मई 2022 को राकेश कुर्रे अपने माता-पिता, जगदीश प्रसाद कुर्रे और तरुणा कुर्रे को लेकर कोरबा से अपने गृह ग्राम कापू जा रहे थे। रात करीब 11 बजे ग्राम भोजपुर के पास सड़क पर अचानक एक गाय के सामने आ जाने के कारण उसे बचाने के प्रयास में वाहन पेड़ से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसेमें तरुणा कुर्रे का पैर फ्रैक्चर हो गया और जगदीश प्रसाद कुर्रे को गंभीर आंतरिक चोटें आईं।

ग्राम कापू के प्रेम लकड़ा और भानु प्रताप ने अपने वाहन से तीनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कापू पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद जगदीश कुर्रे की गंभीर स्थिति के कारण उन्हें अंबिकापुर अस्पताल रेफर किया गया और बाद में वंदना हॉस्पिटल, बिलासपुर में उनका इलाज हुआ। तरुणा कुर्रे का पैर का ऑपरेशन फिरदौसी हॉस्पिटल, अंबिकापुर में हुआ।

राकेश कुर्रे ने दुर्घटना की सूचना कापू थाने में दर्ज कराई और मारुति शोरूम तथा बीमा कंपनी को फोन के माध्यम से सूचित किया। मारुति शोरूम ने वाहन को घटनास्थल से अपने परिसर में लाया और मरम्मत के लिए 1,97,065 रुपये का कोटेशन दिया। हालांकि, बीमा कंपनी ने बीमा दावे को अस्वीकार कर दिया। राकेश कुर्रे के पत्राचार के बावजूद बीमा दावा स्वीकृत नहीं हुआ, जिसे सेवा में कमी और लापरवाही मानते हुए उन्होंने उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, रायगढ़ में परिवाद दायर किया।

आयोग के अध्यक्ष छमेश्वर लाल पटेल और सदस्य राजेंद्र कुमार पांडेय तथा राजश्री अग्रवाल ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद बीमा कंपनी को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 35 का उल्लंघन करने का दोषी पाया। आयोग ने बीमा कंपनी को परिवादी राकेश कुर्रे को बीमा दावे की राशि 1,02,636 रुपये का भुगतान 45 दिनों के भीतर करने, मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए 5,000 रुपये की क्षतिपूर्ति, वाद व्यय के रूप में 10,000 रुपये का भुगतान और यदि 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं हुआ तो राशि पर 9% वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया। इस मामले में परिवादी की ओर से अधिवक्ता बी.एन. साव ने पैरवी की।

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