मोहन भागवत ने संघ शताब्दी वर्ष से जुड़े कार्यक्रम में कहा, आरएसएस के स्वयंसेवक विभिन्न संगठनों में अपने कामकाज में स्वतंत्र और स्वायत्त हैं और उन पर संघ के सुझावों का पालन करने का कोई दबाव नहीं है। संघ से प्राप्त विचारों और संस्कारों के आधार पर आवश्यक परिवर्तन और रचनात्मक सुधार लाने के लिए कई क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि उनका संगठन अपने स्वयंसेवकों और उससे जुड़े संगठनों को सीधे या दूर से नियंत्रित नहीं करता है। संघ किसी दबाव समूह के गठन में नहीं, बल्कि सभी को एकजुट करने में विश्वास रखता है।
भागवत ने संघ शताब्दी वर्ष से जुड़े कार्यक्रम में कहा, आरएसएस के स्वयंसेवक विभिन्न संगठनों में अपने कामकाज में स्वतंत्र और स्वायत्त हैं और उन पर संघ के सुझावों का पालन करने का कोई दबाव नहीं है। संघ से प्राप्त विचारों और संस्कारों के आधार पर आवश्यक परिवर्तन और रचनात्मक सुधार लाने के लिए कई क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। ये स्वयंसेवक जो करते हैं, वह उनका स्वतंत्र, पृथक और स्वायत्त कार्य है। इसका श्रेय उन्हें जाता है, संघ को नहीं। हालांकि, संघ को बदनामी (यदि कोई हो) साझा करनी होगी। क्योंकि हमारे स्वयंसेवक वहां काम कर रहे हैं।




