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सिस्टम से हारा अन्नदाता! धान का टोकन नहीं मिला तो किसान ने ब्लेड से रेत लिया अपना गला, रायपुर रेफर

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ब्यूरो चीफ रतन कुमार

महासमुंद/बागबाहरा: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने धान खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ ग्राम सेनभाठा में टोकन कटवाने के लिए परेशान एक बुजुर्ग किसान ने हताशा में आकर आत्मघाती कदम उठा लिया। तीन दिनों से च्वाइस सेंटर के चक्कर काट रहे किसान ने खेत में जाकर ब्लेड से अपना गला काट लिया। किसान की हालत अत्यंत नाजुक बताई जा रही है।
📍 क्या है पूरा मामला?
घटना कोमाखान थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सेनभाठा की है। यहाँ के रहने वाले 65 वर्षीय किसान मनबोध गांडा के पास करीब 01 एकड़ 40 डिसमिल कृषि भूमि है। वे अपनी उपज बेचने के लिए पिछले तीन दिनों से लगातार च्वाइस सेंटर जा रहे थे ताकि धान बेचने का टोकन मिल सके। लेकिन सर्वर की समस्या या अन्य कारणों से उनका टोकन नहीं कट पा रहा था।
🌾 खेत में खौफनाक कदम
परिजनों और ग्रामीणों के मुताबिक, मनबोध गांडा रोज की तरह सुबह करीब 8 बजे घर से गाय चराने के लिए निकले थे। मानसिक तनाव और व्यवस्था से हताश होकर उन्होंने खेत में ही अपने पास रखे ब्लेड से अपना गला रेत लिया। जब आसपास मौजूद ग्रामीणों ने उन्हें खून से लथपथ देखा, तो तत्काल उनके परिजनों को सूचना दी।
🚑 अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग
घटना की जानकारी मिलते ही डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची।
घायल किसान को आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागबाहरा लाया गया।
यहाँ प्राथमिक उपचार के बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें महासमुंद मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
ताजा जानकारी के अनुसार, किसान की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है और उन्हें बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर करने की तैयारी की जा रही है।
❓ सुलगते सवाल
यह घटना प्रशासनिक दावों की पोल खोलती है। जहाँ सरकार सुगम धान खरीदी के दावे कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर एक छोटे किसान को टोकन के लिए इतना परेशान होना पड़ा कि उसने अपनी जान देने की कोशिश की। 1 एकड़ 40 डिसमिल जमीन वाले इस लघु किसान की पीड़ा ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।

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