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सनौद‌ धान खरीदी केंद्र में बिना टोकन 417 कट्टा धान अवैध तरीके से समय पूर्व खपाने की योजना पर जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी जिला अध्यक्ष के साथ पार्टी के सदस्यों ने फेरा पानी

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बालोद/ गुरुर :- छत्तीसगढ़ में इन दिनों सांय सांय अंदाज में किसानों का धान खरीदी किया जा रहा है। इसके बाद भी किसानों को कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। ऑनलाईन टोकन की समस्या के चलते कई किसान समय पर धान बेचने से वंचित हो चुके है। किसान अपने खेतों में दिन रात मेहनत कर पसीना बहाते है,फिर मौसम की मार और कीट पतंगों और बीमारी से जैसे तैसे किसान अपने फसल को बचा लेता है,फिर कटाई कर बेचने के लिए ऑनलाईन टोकन के लिए घंटों मोबाईल नेटवर्क की तलाश में कई दिनों तक भटकने के बाद टोकन कटता है। एक किसान को अपने खुद की फसल उपजाने के बाद बेचने के लिए भी काफी परेशानियों का सामना करते हुये गुजरना पड़ता है। तब कही जाकर धान बेच पाते है। लेकिन आज एक ऐसा मामला उजागर हुआ है,जिसमें प्राधिकृत अधिकारी अपने ही चक्रव्यूह में पूरी तरह से फंस गये।

मामला सनौद‌ धान खरीदी केंद्र का है,जहां पर किसान बिना वैध टोकन लिये अपने 417 कट्टा धान समय पूर्व खपाने ट्राली के जरिये ले जाकर ढेरी कर रखे हुये थे,तभी जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के क्षेत्रीय सदस्यों और कुछ जागरूक किसानों को जैसे ही इसकी जानकारी प्राप्त हुई,तत्काल धान खरीदी पहुंचकर इसका विरोध कर जमकर हंगामा किया।
शिकायत की जानकारी जैसे ही उच्चाधिकारियों को पता चला प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर अपने पूरे दल बल के साथ पहुंच गए। जांच अधिकारी राजस्व अनुविभागीय अधिकारी आर के सोनकर,तहसीलदार हनुमंत श्याम, नोडल अधिकारी नगर पंचायत सीएमओ गिरीश साहू सहकारिता विभाग सीईओ चंद्रकांत चंद्राकर खाद्य निरीक्षक नरेश पिपरे
एवं अपने अन्य मंडी कर्मचारियों की टीम के साथ कार्यवाही करने पहुंचे हुए थे।
अधिकारी अपनी जिम्मेदारी का फर्ज निभाते हुये भीड़ पर नियंत्रण कर सभी का बयान उपरांत वैधानिक कार्यवाही कर आगे की जांच के लिए सम्बंधित अधिकारी को प्रेषित कर दिया गया है।
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी बालोद जिला अध्यक्ष चंद्रभान साहू ने कहा कि एक तरफ किसान अपने धान की एक एक दाने को बेचने के लिए ऑनलाईन टोकन के कारण समय का इंतजार कर रहे है। और ऐसे में बिना टोकन के अवैधानिक रूप से किसान का धान खपाना किसानों के साथ धोखा और छलावा है। भाजपा की डबल इंजन की सरकार एक ओर सुशासन दिवस मना रहा है,सरकार की नीति और रीति को उलट फेर करने पर तुले हुये है,यहां के प्राधिकृत अधिकारी नंद कुमार साहू अपनी जिम्मेदारी पद का गलत तरीके से निभा रहे है,जो कि मामला बेहद ही शर्मनाक और किसानों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुये, इस घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्यवाही कर इस घटना की निंदा कर क्षेत्र की किसानों को अपने हक और अधिकार के लिए जागरूक रहने को कहा गया।
प्राधिकृत अधिकारी नंद कुमार साहू ने बताया कि ग्राम पलारी के मानस मंच के पास गांव के कई किसानों का धान पड़ा हुआ है,विश्व हिंदू जागरण मंच कार्यक्रम का आयोजन इसी स्थल पर 20 दिसंबर को किया जाना है करके चर्चा चल रही थी। इन्हीं बातों को ध्यान में रख कर मंच के नजदीक में खुले रखे हुये धान को जिसमें से एक किसान फुलमत बाई पति भूपेंद्र साहू का धान रखा हुआ था। जिसकी देखरेख एवं खेती किसानी की पूरी जिम्मेदारी पलारी निवासी फगवा साहू करते है,जिसे कहा गया की आप इस धान को अन्यत्र जगह व्यवस्थित कर लेवे ताकि कार्यक्रम का आयोजन इस मंच पर आयोजक समिति वाले करा सके। इसी बात को ध्यान में रखते हुये मुझे आनन फानन में इस तरह का किसान के लिए रास्ता चुनना पड़ा,और मेरे ही कहने पर टोकन तिथि के पूर्व बिना गेटपास और बिना टोकन के अंदर जाने के लिए मेरे द्वारा ही कहा गया था करके इस बात को प्राधिकृत अधिकारी द्वारा जांच अधिकारियों के समक्ष स्वीकार किया गया।
सहायक प्रबंधक चंद्रहास साहू ने बताया कि यहां पर धान की ढेरी कितने बजे और किसके कहने पर लाकर रखा गया था उसकी जानकारी मुझे नहीं था। क्योंकि उस धान का ग्रेडिंग नहीं हुआ था।
फगवा राम का कहना था कि प्राधिकृत अधिकारी से 2 दिन पूर्व बात हो गया था, जिसके कहे अनुसार मैं अपने मालिक के धान को खरीदी केंद्र में बेचने लाया था। आज के तारीख में धान का तौल तो होगा लेकिन आपके खाते में एंट्री 1 जनवरी 2026 मतलब ऑनलाईन टोकन तिथि में ही किया जाएगा ऐसा जानकारी दिया गया था।
इस क्षेत्र के किसानो का उग्र होने का एक ही कारण था कि सरकार जब ऑफलाईन टोकन के लिए 30% खरीदी केंद्र को सौंप दिया गया है, उसके बावजूद कई गरीब किसान धान बेचने के लिए समय का इंतजार करते इधर उधर भटकते हुए थक चुके है। जो किसानों के साथ भेदभाव और सहनशीलता से खिलवाड़ करने जैसी घटना को परिलक्षित करता है।
ऐसे ही मामलों की वजह से किसानों की ताल मेल में दूरियां बढ़ती है। अगर सरकार की सिस्टम को तोड़ मरोड़ कर स्वयंभू नीति चलाने लग गये तो किसान हितैषी बात करने वाली सरकार की नियमों को ताक पर रख कर ऐसे जिम्मेदार पद पर आसीन रहने वाले लोग धज्जियां उड़ा देंगे।

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