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गन्ना कारखाने में जाम, प्रशासन मौन — क्या किसान की तकलीफ मुद्दा नहीं?

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ब्यूरो चीफ़ — रतन कुमार

बालोद। जिले के करकाभाट शक्कर कारखाना में गन्ना पेराई शुरू नहीं होने से सैकड़ों गन्ना किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। 15 दिसंबर से गन्ना मंगवाने का निर्देश तो दे दिया गया, लेकिन बॉयलर और अन्य तकनीकी खामियों के कारण अब तक मिल शुरू नहीं हो पाई, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है।
कारखाने के बाहर गन्ने से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली और ट्रक 4–5 दिनों से खड़े हैं। इससे गन्ना सूखने और खराब होने का खतरा बढ़ गया है। ठंड में किसान रात-रात भर गाड़ियाँ संभालते हुए पहरा देने को मजबूर हैं।
“मशीनें तैयार नहीं थीं, तो गन्ना क्यों बुलवाया?”
किसानों ने सवाल उठाया कि जब मिल की मशीनरी पूरी तरह तैयार ही नहीं थी, तो टोकन जारी कर गन्ना मंगवाने की क्या मजबूरी थी। देरी से न सिर्फ समय बरबाद हो रहा है, बल्कि वाहन किराया, मजदूरी और खेतों के काम में भी बाधा आ रही है।


रबी फसल पर भी असर
रबी फसल की बुआई, बीज और खेत तैयार करने का समय चल रहा है, लेकिन किसान कारखाने के बाहर फँसे रहने के कारण अपने खेतों पर ध्यान नहीं दे पा रहे। इससे अतिरिक्त आर्थिक नुकसान की चिंता बढ़ गई है।
प्रबंधन का तर्क — इंजीनियर की फ्लाइट मिस
कारखाने के महाप्रबंधक लिलेश्वर देवांगन के अनुसार, कारखाना तभी शुरू हो सकेगा, जब फरीदाबाद से बुलाए गए इंजीनियर पहुंच जाएंगे। फ्लाइट मिस होने से देरी हुई है।
लेकिन किसानों का कहना है कि हर साल इसी तरह तकनीकी कारणों का हवाला देकर उन्हें परेशान किया जाता है।
एक दशक बाद भी व्यवस्था कमजोर
स्थापना के लगभग एक दशक बाद भी करकाभाट शक्कर कारखाने में ठोस प्रबंधन व्यवस्था विकसित नहीं हो सकी। हर वर्ष पेराई के समय संकट खड़ा हो जाता है और सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को झेलना पड़ता है।
“अब गन्ना बोआई बंद करेंगे”
आक्रोशित किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो वे अगले साल गन्ना बोआई कम करने या बंद करने का निर्णय लेने को मजबूर होंगे।
प्रशासन पर सवाल
मामले में प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। किसान मांग कर रहे हैं कि:
तुरंत पेराई शुरू कराई जाए,
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो,
और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।

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