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सफलता की कहानी- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से बदली केसर निषाद की ज़िंदगी, बेटियों को मिला सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य

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ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया

ग्राम खुड़मुड़ा की निवासी केसर निषाद जो एक साधारण और मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती है | इनके पति मजदूरी कर परिवार का) भरण-पोषण करते हैं और उन्हीं की सीमित आय से घर चलता है। आर्थिक परिस्थितियाँ कठिन होने के बावजूद उन्होंने हमेशा अपने बच्चों को स्वस्थ और बेहतर भविष्य देने का सपना देखा है। इस सपने को साकार करने में शासन की योजनाओं, विशेषकर प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, ने उनकी बहुत मदद की।
केसर निषाद का कहना है कि जब मैं पहली बार गर्भवती हुई, तब मैंने अपने गाँव के आंगनबाड़ी केंद्र में पंजीकरण कराया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दीदी ने मेरी गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से मेरे स्वास्थ्य की देखभाल की। उन्होंने मुझे संतुलित आहार, सही पोषण, समय पर भोजन, स्वच्छता और आराम के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने यह भी समझाया कि आयरन और कैल्सियम की दवाइयाँ माँ और गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए कितनी आवश्यक होती हैं। उनके मार्गदर्शन से मैं अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हुई।
वो कहती है इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दीदी ने मुझे प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के बारे में बताया। उन्होंने समझाया कि प्रथम गर्भावस्था में प्रथम संतान के जन्म पर सरकार द्वारा ₹5000 की आर्थिक सहायता दो किस्तों में दी जाती है। यह जानकारी मेरे लिए बहुत उपयोगी साबित हुई और मैंने तुरंत योजना के अंतर्गत पंजीकरण कराया। दो टीकाकरण पूर्ण होने के बाद मुझे ₹3000 की पहली किस्त मेरे बैंक खाते में प्राप्त हुई। इस राशि का उपयोग मैंने पौष्टिक आहार, दवाइयों और अपने स्वास्थ्य पर किया। इसके बाद जब मेरी पुत्री का जन्म हुआ और उसके तीन टीके पूर्ण हुए, तो मुझे योजना की ₹2000 की दूसरी किस्त प्राप्त हुई। इस आर्थिक सहयोग से मुझे अपनी बेटी की बेहतर देखभाल करने में काफी मदद मिली। समय पर पोषण, टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलने से मेरी बेटी स्वस्थ रही, जिससे मुझे आत्मविश्वास और मानसिक संतोष मिला।
लगभग तीन वर्ष बाद जब मैं दूसरी बार गर्भवती हुई और फिर से मुझे पुत्री का जन्म हुआ, तब मुझे कार्यकर्ता दीदी की बताई गई एक और महत्वपूर्ण जानकारी याद आई। उन्होंने पहले ही बताया था कि यदि द्वितीय संतान भी पुत्री होती है, तो प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत ₹6000 की एकमुश्त राशि सीधे बैंक खाते में प्रदान की जाती है। इस योजना का लाभ मुझे भी मिला और यह राशि मेरे खाते में जमा हुई। इस आर्थिक सहायता का मैंने सदुपयोग किया। एक ओर जहाँ मैंने अपने स्वास्थ्य और पोषण पर खर्च किया, वहीं दूसरी ओर मैंने अपनी पहली पुत्री का सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खाता खुलवाया। यह खाता मेरी बेटी की शिक्षा और भविष्य की जरूरतों के लिए एक मजबूत आधार बनेगा। इससे मुझे यह विश्वास मिला कि मेरी बेटियाँ आगे चलकर पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनेंगी और उनका भविष्य सुरक्षित रहेगा।
इसके साथ ही मुझे महिला एवं बाल विकास विभाग की अन्य योजनाओं का लाभ भी लगातार मिलता रहा, जैसे—पूरक पोषण आहार, नियमित टीकाकरण, स्वास्थ्य परामर्श एवं देखभाल सेवाएँ। इन सभी सेवाओं ने न केवल मेरे बच्चों के शारीरिक विकास में मदद की, बल्कि मुझे एक जिम्मेदार और जागरूक माँ बनने की प्रेरणा भी दी। आज मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकती हूँ कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना ने मेरे जैसी अनेक माताओं को आर्थिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाया है। शासन द्वारा दी गई इस सहायता ने मेरे और मेरी दोनों बेटियों को स्वस्थ जीवन की राह दिखाई है। इसके लिए मैं शासन, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा हमारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दीदी की हृदय से आभारी हूँ। यह योजना वास्तव में मातृत्व को सम्मान देने और बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने का कार्य कर रही है।

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