– राज्य के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों पर भीड़ को कम करने शासन ने लिया फैसला
रायपुर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में अब सर्दी-जुकाम, बुखार और उल्टी-दस्त के अलावा शुगर, थायराइड, खून पतला होने वाली दवाएं भी मरीजों को मिलेंगी। अभी ये दवाएं केवल जिला या मेडिकल कॉलेज में ही दी जाती हैं। इसलिए इस मर्ज के बीमारों को बार-बार गांव से दूर शहर के मेडिकल कॉलेज या जिला अस्पताल जाना पड़ता है। जिसकी वजह से मेडिकल कॉलेजों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। अब इस व्यवस्था से गांव के अस्पतालों में दवाएं मिलने से मरीजों को राहत मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग ने अत्यावश्यक दवाओं की सूची में बढ़ोतरी कर दी है। प्रायमरी हेल्थ सेंटरों में 146 किस्म से बढ़ाकर 247 और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 196 से बढ़ाकर 365 किस्म की दवाएं सप्लाई की जाएंगी। वहीं जिला अस्पतालों की दवाओं की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। यानि वर्तमान में जिला अस्पतालों में 208 किस्म की दवाएं उपलब्ध हैं। इनकी संख्या बढ़ाकर 807 की जा रही है, यानी जो दवाएं मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में मरीजों को उपलब्ध कराई जाती हैं, वही अब जिला अस्पताल में मिलेंगी। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के अनुसार- जिला अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की पोस्टिंग है। जनरल सर्जरी के अलावा मेडिसिन के केस भी आते हैं। मेडिसिन और हड्डी के विशेषज्ञों की पोस्टिंग भी है। पर दवाओं की कमी से गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया जाता है। अब दवाओं का स्टॉक बढ़ जाने से ज्यादातर मरीजों का इलाज यहीं संभव हो सकेगा। इससे मेडिकल कॉलेज में मरीजों का बोझ घटेगा।
इंडियन प्राइमरी हेल्थ सिस्टम का निर्णय
केंद्र सरकार द्वारा गांव गांव के अस्पतालों के लिए इंडियन प्राइमरी हेल्थ सिस्टम बनाया गया है। उस सिस्टम के तहत गांव गांव के अस्पतालों में मरीजों को ज्यादा से ज्यादा दवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश हैं। इसके लिए दवाओं के स्टॉक का भी मापदंड तय है। राज्य शासन ने अब उसी सिस्टम को लागू करते हुए गांव के अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने का निर्णय लिया है ताकि मरीजों को अपने निवास के करीब ही बेहतर इलाज मिल जाए।
स्वास्थ्य केन्द्रों में भी दवाएं
स्वास्थ्य संचालक संजीव झा ने बताया उप स्वास्थ्य केंद्रों में सीएचओ देंगे दवाइयां। ग्रामीण इलाकों में दवाओं की कमी के कारण कई बार मरीज परेशान होते है। गंभीर बीमारियों की दवाएं घर के मिलने से मरीजों को राहत मिलेगी। कमियां मिलने पर उन्हें दूर किया जाएगा ताकि ये सिस्टम बेहतर तरीके से संचालित हो। साथ ये समीक्षा की भी जाएगी कि इस प्रयोग में किसी तरह की खामी तो नहीं है। उप स्वास्थ्य केंद्रों में भी 146 किस्म की दवाएं अब उपलब्ध कराई जाएंगी।




