भाटापारा/ कामधेनु गौशाला ने गौसेवा के साथ मानव सेवा को भी अपना उद्देश्य बना लिया। घर से बेघर हुए निषाद दंपति को शरण देते हुए उसकी गर्भवती पत्नी का प्रसव करा कर उसके परिवार को विस्थापित किया।
टेहका मार्ग कामधेनु गौशला पिछले 17 वर्ष से संचालित हो रही है। नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष कैलाश अग्रवाल की पहल पर निरीह और सूखी गायों के लिए कामधेनु गौशाला स्थापित की गई। गौशाला में सूखी,अपंग गायों को रखा गया है। सूखी गायों के साथ दुर्घटना में अपंग गायों को गौशाला लाकर डाक्टर से इलाज करा रखा जाता है। दस एकड़ में फैली गौशाला में गायों के लिए सुख सुविधा का इंतजाम किया गया है। गौ परिसर में पंखे और कूलर लगे हैं। नागरिकों के सहयोग से गौशाला चल रही है। जहाँ समय समय पर गोपाल अग्रवाल, मदन अग्रवाल, राकेश उपाध्याय, रमेश शर्मा जैसे अनेक नागरिक गौशाला में सहयोग करते हैं। वृद्ध हुए कैलाश अग्रवाल हर रोज यहां अपनी हाजरी देते हैं।
गौशाला में गोढ़ी गाँव से निष्कासित हुए रोहित निषाद अपनी गर्भवती पत्नी बच्चों सहित गौशाला में अपनी आपबीती सुनाते हुए निकला। कैलाश अग्रवाल को निषाद परिवार की हालात का पता लगा तो उन्हें खोजने के लिए कहा। ठंड में ठिठुरता रोहित अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रेलवे स्टेशन में बैठा था। गोपाल गोयल उन्हें लाकर गौशाला में आश्रय दे दिया । उसी रात रोहित की पत्नी राजकुमारी ने एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची के जन्म से गौशाला में खुशी की लहर फैल गयी। कैलाश अग्रवाल के निर्देश पर उन्हें निषाद परिवार को गौशाला में रहने के साथ दंपत्ति को काम में रख लिया। बोल बम समिति के गोपाल गोयल ने बच्ची के जन्म पर मिठाई बंटवाई और खुशी खुशी में बच्ची को गोद लेकर जेठू गोयल ने फोटो खिंचवाई।




