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बातां कुरीतियां री, चर्चा समाधान री’ विषय पर संगोष्ठी

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अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन की सार्थक पहल

कोलकाता। अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के केंद्रीय कार्यालय सभागार, डकबैक हाउस में ‘बातां कुरीतियां री, चर्चा समाधान री’ विषय पर एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
मुख्य वक्ता सिटी केबल के निदेशक और श्री विशुद्धानंद हॉस्पिटल के सचिव श्री सुरेंद्र अग्रवाल ने संगोष्ठी के विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज में समस्याएं पहले भी थीं और आज भी हैं, किंतु कुरीतियां वे नहीं होतीं जो शोर मचाती हैं, बल्कि वे होती हैं जिन्हें समाज चुपचाप स्वीकार कर लेता है। उन्होंने विवाह में बढ़ती आयु, तलाक की बढ़ती प्रवृत्ति, परिवारों के विघटन और दिखावे की संस्कृति पर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि मेडिकल साइंस के अनुसार लड़कियों का विवाह 18 से 21 वर्ष की आयु में उपयुक्त माना जाता है। आज देर से विवाह, नौकरी की व्यस्तता एवं व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के कारण पति-पत्नी के बीच सामंजस्य की कमी देखी जा रही है, जिससे पारिवारिक टूटन और तलाक की घटनाएं बढ़ रही हैं।
उन्होंने संयुक्त परिवार प्रणाली को समाज की शक्ति बताते हुए कहा कि जहाँ आज भी संयुक्त परिवार हैं, वहाँ तलाक की समस्याएं अपेक्षाकृत कम हैं। समाज को ऐसे परिवारों को सम्मानित कर उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कर्ज लेकर शादियों में अनावश्यक खर्च की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई और संगठन के माध्यम से समाज को जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया।

जूम के माध्यम से जुड़े राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पवन कुमार गोयनका ने कहा कि मद्यपान, तलाक, छोटे परिवार और बच्चों के देर से विवाह जैसी आज की कुरीतियों पर गंभीर चर्चा कर समाधान खोजने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि समाज को इन विषयों पर खुलकर संवाद करने की आवश्यकता है
विषय प्रवर्तन करते हुए सेमिनार उपसमिति के चेयरमैन श्री संजय हरलालका ने कहा कि सम्मेलन निरंतर कुरीतियों पर चर्चा करता आया है। यद्यपि कुरीतियां बढ़ रही हैं, फिर भी हमें प्रयास करना नहीं छोड़ना चाहिए। यह संगोष्ठी विचारों के आदान-प्रदान की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। उन्होंने महिलाओं और युवाओं की भूमिका को सबसे अहम बताते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी केवल पाश्चात्य संस्कृति ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भी अपना रही है।

राष्ट्रीय महामंत्री श्री केदारनाथ गुप्ता ने कहा कि समाज सुधार के लिए सबसे पहले हमें स्वयं को अनुशासित करना होगा। जब हम स्वयं सुधरेंगे, तभी समाज भी सुधरेगा। उन्होंने कहा कि जहाँ समस्याएं हैं, वहीं समाधान भी हैं।

पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गोवर्धन प्रसाद गाड़ोदिया ने कहा कि सम्मेलन की स्थापना ही समाज से कुरीतियों को दूर करने के उद्देश्य से की गई थी। आज नई-नई कुरीतियां जन्म ले रही हैं, जिन पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

इसके अलावा श्री आत्माराम सोंथलिया, श्री नंदलाल सिंघानिया, श्री अजय नांगलिया, श्री उत्तम गुप्ता, सुश्री पिंकी सेखानी एवं श्री संज्जन खंडेलवाल ने भी अपने विचार रखे और समाज सुधार की दिशा में सुझाव दिए।

कार्यक्रम के अंत में सेमिनार उपसमिति के संयोजक श्री विष्णु अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. सुभाष अग्रवाल सहित श्री घनश्याम सुगला, श्री अजय कुमार नांगलिया, श्री निश्छल दसानी, श्री संदीप कुमार सेक्सरिया, श्री बिनोद कुमार लिहला, श्री केदारमल झवर, श्री सीताराम अग्रवाल, श्री जुगल किशोर जाजोदिया, श्री बाल किशन जालान, श्री गोपाल अग्रवाल, श्री प्रदीप कुमार जालान, श्री शिव कुमार अग्रवाल, श्रीमती मंजू अग्रवाल, श्री राजेश सोनी, श्री संदीप मारोदिया सहित अनेक गणमान्य सदस्य संगोष्ठी में शरीक हुए।

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