जगदलपुर- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान सीएम ने उन्हें ढोकरा आर्ट से बने कर्मा वृक्ष, कोसा शिल्प से तैयार गमछा भेंट किया। इससे पहले कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर राष्ट्रपति ने स्टॉल का निरीक्षण किया था।
मुर्मू ने आदिवासी संस्कृति, पंरपरा को करीब से देखा। बस्तर पंडुम के तहत कई जनजातियों के पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, वाद्ययंत्र, वेशभूषा और रीति-रिवाजों की आकर्षक प्रस्तुतियां दी जा रही हैं।
राष्ट्रपति के भाषण की बड़ी बातें
- जय जोहार और मां दंतेश्वरी की जय बोलकर राष्ट्रपति ने भाषण शुरू किया
- जब भी छत्तीसगढ़ आती हूं तो ऐसा लगता है अपने घर आती हूं
- छत्तीसगढ़ की संस्कृति प्राचीन होने के साथ सबसे मीठी
- बस्तर पडुंम को लोग उत्सव की तरह जीते हैं
- बस्तर की सुंदरता और संस्कृति पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
- बस्तर में पिछले 4 दशक में नक्सलवाद के कारण आदिवासियों को नुकसान हुआ।
- अब बस्तर नक्सल मुक्त हो रहा है। बड़ी संख्या में नक्सली हथियार डाल रहे हैं।
- बस्तर में विकास का सूर्योदय हो रहा है। गांव-गांव में स्कूल खुल रहे हैं। बिजली पानी और सड़क की सुविधाएं मिल रही हैं।
- हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे लोगों का स्वागत करती हूं, जो लोग बरगला रहे हैं उनकी बातों में न आएं
- सरकार आप लोगों के लिए समर्पित है, बस्तर के अदिवासी जो पिछड़े रह गए उनका विकास होना चाहिए। गरीबों का कल्याण करना ये सरकार की पहली प्राथमिकता है।
- इस क्षेत्र से डॉ बुधरी ताती और एक अन्य डॉक्टर दंपती को पद्मश्री अवॉर्ड मिला है। मैं उन्हें बधाई देती हूं।




