थानखम्हरिया। स्थानीय रामचंद्र सागरमल धर्मशाला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन हवन-पूजन, पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारे के साथ श्रद्धा एवं भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। कथा व्यास आचार्य अक्षय नारायण दुबे महाराज ने विधि-विधानपूर्वक कथा का समापन कराते हुए तुलसी वर्षा, हवन एवं पूजा-अर्चना के साथ कथा को विश्राम दिया।
समापन अवसर पर आचार्य दुबे ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को नैतिकता, सदाचार, मानवता और धर्म का संदेश देने का सशक्त माध्यम है। कथा श्रवण से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है तथा आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र, सच्ची भक्ति, धर्म एवं मानव कल्याण से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि हवन, यज्ञ एवं पूर्णाहुति जैसे वैदिक अनुष्ठान सकारात्मक एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं। इससे परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि आती है तथा समाज में सद्भाव और धार्मिक चेतना को बल मिलता है। उपस्थित श्रद्धालुओं ने हवन एवं पूर्णाहुति में भाग लेकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ संपन्न हुए इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कथा के मुख्य यजमान राजेश ठाकुर एवं उमा ठाकुर ने पूर्णाहुति कर धर्म लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मातृशक्ति एवं ऋद्धि-सिद्धि गणेश उत्सव समिति के सदस्यों का विशेष योगदान रहा।
कथा समापन के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें नगर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालु कथा रस में सराबोर रहे।
इस अवसर पर नयन ठाकुर, यज्ञ शर्मा, ऐश्वर्य अग्रवाल, शुभम सिंह, वंश केडिया, अर्पित राजपूत, दिलीप राजपूत, संतोष अग्रवाल, ढाल सिंह राजपूत, गिरीश शर्मा, सुनील राजपूत, विपिन शर्मा, घनश्याम केडिया, प्रमोद सिंघानिया, हरि केडिया, मनीष शर्मा, विनोद सिंघानिया, सनत सिंह राजपूत सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।




