ब्यूरो चीफ : अनिल सिंघानिया
थानखम्हरिया। नगर का सरस्वती शिशु मंदिर शिक्षा और संस्कार के समन्वय का उत्कृष्ट केंद्र बनकर क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुका है। विद्या भारती से संबद्ध यह शिक्षण संस्था भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से संस्कारित पीढ़ी के निर्माण में निरंतर योगदान दे रही है।
विद्यालय की स्थापना लगभग 40 वर्ष पूर्व हुई थी। प्रारंभिक दौर में रामचंद्र सागरमल धर्मशाला में मात्र 10 विद्यार्थियों के साथ निःशुल्क शिक्षा कार्य प्रारंभ किया गया था। समय के साथ विद्यालय का विस्तार हुआ और आज यह क्षेत्र के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में शामिल है। वर्तमान में विद्यालय का स्वयं का भवन है तथा लगभग 85 गांवों के विद्यार्थी यहां अध्ययनरत हैं।
विद्यालय के प्राचार्य लखन साहू ने बताया कि वर्तमान में विद्यालय में कुल 856 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। नए शैक्षणिक सत्र में अब तक 40 नए विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। विद्यालय में 35 शिक्षक-शिक्षिकाओं सहित आया, चपरासी और वाहन चालकों को मिलाकर लगभग 50 सदस्यीय स्टाफ कार्यरत है। उन्होंने बताया कि आगामी 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को भव्य रूप से मनाने की तैयारियां भी जारी हैं।

सरस्वती शिशु मंदिर एवं सरस्वती विद्या मंदिर विद्यालयों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान कर उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना तथा उन्हें श्रेष्ठ नागरिक बनाना है। विद्यालय शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ खेलकूद, सांस्कृतिक एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं में भी जिले स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए जाना जाता है।
विद्यालय की विशेषता यह है कि यहां आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और अनुशासन का समावेश किया जाता है। विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम की शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला, सामाजिक दायित्वों और राष्ट्रभक्ति के संस्कार भी प्रदान किए जाते हैं। कक्षाओं के सुचारु संचालन के लिए छात्र प्रतिनिधियों का चयन किया जाता है तथा आचार्यों द्वारा विद्यार्थियों के आचरण एवं संस्कारों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
अभिभावक प्रेम परमार ने विद्यालय की प्रशंसा करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। यहां बच्चों को पढ़ाई के साथ भारतीय संस्कार, नैतिक मूल्य और आधुनिक शिक्षा का बेहतर वातावरण मिलता है, जिससे उनका व्यक्तित्व निखरता है।
विद्यालय का वातावरण पारिवारिक और अनुशासित है, जहां छात्र-छात्राएं आपसी सम्मान और भाई-बहन की भावना के साथ अध्ययन करते हैं। यही कारण है कि सरस्वती शिशु मंदिर आज क्षेत्र में शिक्षा और संस्कार का एक आदर्श केंद्र बनकर उभरा है।




