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“आपातकाल के 51 वर्ष: लोकतंत्र की हत्या का काला दिन” – भाजपा ने प्रेस वार्ता में कांग्रेस के तानाशाही इतिहास को किया बेनकाब

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भाटापारा ब्यूरो संतोष कुमार साहू

 

भाटापारा::- 25 जून 1975 को कांग्रेस सरकार द्वारा देश पर थोपे गए आपातकाल के 51 वर्ष पूर्ण होने पर भारतीय जनता पार्टी, बलौदाबाजार-भाटापारा द्वारा आज भाजपा कार्यालय भाटापारा में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने आपातकाल को स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे कलंकित अध्याय बताते हुए कांग्रेस की लोकतंत्र विरोधी मानसिकता पर तीखा प्रहार किया।

नेताओं ने कहा कि 21 महीने तक चला आपातकाल का दौर भारत के संविधान, न्यायपालिका, मीडिया और नागरिक अधिकारों की हत्या का दौर था। आज 51 साल बाद भी देश उस अंधकार युग की पीड़ा को नहीं भूला है।

किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष आलोक ठाकुर ने कहा: आपातकाल कांग्रेस की तानाशाही और लोकतंत्र विरोधी सोच का सबसे बड़ा प्रमाण है। 25 जून 1975 की आधी रात को जब देश सो रहा था, तब इंदिरा सरकार ने संविधान को ताक पर रखकर लोकतंत्र का गला घोंट दिया। लाखों किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए। बोलने की आजादी, विरोध करने का हक – सब कुछ कुचल दिया गया। आज जो कांग्रेस संविधान बचाने की बात करती है, उसी ने 1975 में संविधान के हर पन्ने को रौंदा था। 21 महीने तक महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट ने हर गांव, हर घर को तोड़ा। भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता घर-घर जाकर नई पीढ़ी को कांग्रेस के इस काले सच से अवगत करा रहा है, ताकि कोई फिर लोकतंत्र को बंधक बनाने की हिम्मत न कर सके।

वरिष्ठ भाजपा नेता शिवरतन शर्मा ने कहा: 25 जून 1975 की वो काली रात देश के लोकतांत्रिक इतिहास पर सबसे बड़ा धब्बा है। 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जगमोहन लाल सिन्हा ने इंदिरा गांधी को चुनाव में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का दोषी ठहराया था। उनका रायबरेली से निर्वाचन रद्द कर दिया गया, 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई और सार्वजनिक पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। गुजरात विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस के विरुद्ध प्रचंड जनादेश आया था।

अपनी सत्ता बचाने के लिए बौखलाई इंदिरा गांधी ने आधी रात को मंत्रिमंडल को भी अंधेरे में रखकर आपातकाल थोप दिया। उसके बाद देश में जो हुआ वो किसी तानाशाह से कम नहीं था। अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मोरारजी देसाई, जयप्रकाश नारायण समेत लाखों विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को आधी रात को सोते से उठाकर मीसा और डीआईआर के तहत जेलों में ठूंस दिया गया।

प्रेस सेंसरशिप लागू कर दी गई। अखबारों के दफ्तरों में बिजली काट दी जाती थी, संपादकों को खबरें छापने से पहले सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी। अखबारों में बड़े-बड़े खाली कॉलम छपते थे। न्यायपालिका को नियंत्रित कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीशों को दरकिनार कर अपने पसंदीदा व्यक्ति को मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। दिल्ली के तुर्कमान गेट पर सौंदर्यीकरण के नाम पर हजारों गरीबों के घर बुलडोजर से उजाड़ दिए गए। विदेशी मीडिया तक ने इंदिरा सरकार को तानाशाह करार दिया था।

भाजपा जिला अध्यक्ष आनंद यादव ने कहा: कांग्रेस का असली चेहरा आपातकाल में पूरी तरह बेनकाब हो गया था। आज जो राहुल गांधी संविधान की प्रति लेकर घूमते हैं, उनकी दादी इंदिरा गांधी ने 42वें संविधान संशोधन के जरिए संविधान की आत्मा को ही बदलने की कोशिश की थी। ‘सेक्युलर’ और ‘समाजवादी’ शब्द जबरन प्रस्तावना में जोड़कर संसद की शक्तियों का दुरुपयोग किया गया था।

इस वार्ता में भाजपा नेता राकेश तिवारी, ओम प्रकाश देवांगन, नगर पालिका अध्यक्ष अश्वनी शर्मा, द्वारका वर्मा भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने भी आपातकाल को लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला बताया।साहू

“आपातकाल के 51 वर्ष: लोकतंत्र की हत्या का काला दिन” – भाजपा ने प्रेस वार्ता में कांग्रेस के तानाशाही इतिहास को किया बेनकाब

भाटापारा::- 25 जून 1975 को कांग्रेस सरकार द्वारा देश पर थोपे गए आपातकाल के 51 वर्ष पूर्ण होने पर भारतीय जनता पार्टी, बलौदाबाजार-भाटापारा द्वारा आज भाजपा कार्यालय भाटापारा में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने आपातकाल को स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे कलंकित अध्याय बताते हुए कांग्रेस की लोकतंत्र विरोधी मानसिकता पर तीखा प्रहार किया।

नेताओं ने कहा कि 21 महीने तक चला आपातकाल का दौर भारत के संविधान, न्यायपालिका, मीडिया और नागरिक अधिकारों की हत्या का दौर था। आज 51 साल बाद भी देश उस अंधकार युग की पीड़ा को नहीं भूला है।

किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष आलोक ठाकुर ने कहा: आपातकाल कांग्रेस की तानाशाही और लोकतंत्र विरोधी सोच का सबसे बड़ा प्रमाण है। 25 जून 1975 की आधी रात को जब देश सो रहा था, तब इंदिरा सरकार ने संविधान को ताक पर रखकर लोकतंत्र का गला घोंट दिया। लाखों किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए। बोलने की आजादी, विरोध करने का हक – सब कुछ कुचल दिया गया। आज जो कांग्रेस संविधान बचाने की बात करती है, उसी ने 1975 में संविधान के हर पन्ने को रौंदा था। 21 महीने तक महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट ने हर गांव, हर घर को तोड़ा। भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता घर-घर जाकर नई पीढ़ी को कांग्रेस के इस काले सच से अवगत करा रहा है, ताकि कोई फिर लोकतंत्र को बंधक बनाने की हिम्मत न कर सके।

वरिष्ठ भाजपा नेता शिवरतन शर्मा ने कहा: 25 जून 1975 की वो काली रात देश के लोकतांत्रिक इतिहास पर सबसे बड़ा धब्बा है। 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जगमोहन लाल सिन्हा ने इंदिरा गांधी को चुनाव में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का दोषी ठहराया था। उनका रायबरेली से निर्वाचन रद्द कर दिया गया, 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई और सार्वजनिक पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। गुजरात विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस के विरुद्ध प्रचंड जनादेश आया था।

अपनी सत्ता बचाने के लिए बौखलाई इंदिरा गांधी ने आधी रात को मंत्रिमंडल को भी अंधेरे में रखकर आपातकाल थोप दिया। उसके बाद देश में जो हुआ वो किसी तानाशाह से कम नहीं था। अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मोरारजी देसाई, जयप्रकाश नारायण समेत लाखों विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को आधी रात को सोते से उठाकर मीसा और डीआईआर के तहत जेलों में ठूंस दिया गया।

प्रेस सेंसरशिप लागू कर दी गई। अखबारों के दफ्तरों में बिजली काट दी जाती थी, संपादकों को खबरें छापने से पहले सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी। अखबारों में बड़े-बड़े खाली कॉलम छपते थे। न्यायपालिका को नियंत्रित कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीशों को दरकिनार कर अपने पसंदीदा व्यक्ति को मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। दिल्ली के तुर्कमान गेट पर सौंदर्यीकरण के नाम पर हजारों गरीबों के घर बुलडोजर से उजाड़ दिए गए। विदेशी मीडिया तक ने इंदिरा सरकार को तानाशाह करार दिया था।

भाजपा जिला अध्यक्ष आनंद यादव ने कहा: कांग्रेस का असली चेहरा आपातकाल में पूरी तरह बेनकाब हो गया था। आज जो राहुल गांधी संविधान की प्रति लेकर घूमते हैं, उनकी दादी इंदिरा गांधी ने 42वें संविधान संशोधन के जरिए संविधान की आत्मा को ही बदलने की कोशिश की थी। ‘सेक्युलर’ और ‘समाजवादी’ शब्द जबरन प्रस्तावना में जोड़कर संसद की शक्तियों का दुरुपयोग किया गया था।

इस वार्ता में भाजपा नेता राकेश तिवारी, ओम प्रकाश देवांगन, नगर पालिका अध्यक्ष अश्वनी शर्मा, द्वारका वर्मा भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने भी आपातकाल को लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला बताया।

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