ब्यूरो चीफ : अनिल सिंघानिया
थानखम्हरिया। स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर में शनिवार को नव-निर्मित शिशु वाटिका का शुभारंभ वैदिक विधि-विधान के साथ किया गया। इस अवसर पर मां सरस्वती का पूजन, श्री सत्यनारायण कथा, हवन, आरती एवं प्रसाद वितरण के बाद नन्हे बच्चों का तिलक-वंदन कर उन्हें नए कक्ष में प्रवेश कराया गया।
सरस्वती शिक्षा संस्थान की योजना के अनुरूप छोटे बच्चों के सर्वांगीण विकास तथा ‘खेल-खेल में शिक्षा’ की अवधारणा को साकार करने के उद्देश्य से आधुनिक सुविधाओं से युक्त शिशु वाटिका का निर्माण किया गया है। यहां आकर्षक चित्रकारी, शैक्षणिक एवं खेल सामग्री, झूले, फिसलपट्टी, तरणताल सहित बच्चों के मनोरंजन और सीखने की विभिन्न व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
कार्यक्रम में पंडित ऋषि प्रसाद तिवारी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन संपन्न कराया। इसके पश्चात बच्चों का तिलक-वंदन कर नए कक्ष में प्रवेश कराया गया। नए वातावरण और आकर्षक खेल सामग्री को देखकर बच्चों में विशेष उत्साह और आनंद देखने को मिला।
इस अवसर पर विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष पुरुषोत्तम अग्रवाल, व्यवस्थापक राकेश जोशी, उपाध्यक्ष सुरेश सिंघानिया, सह व्यवस्थापक पुरुषोत्तम सिंघानिया, सदस्य गोपाल कागलीवाल, देवानंद त्रिपाठी, विद्यालय के प्राचार्य लखनलाल साहू, आचार्य बंधु-भगिनी, अभिभावक तथा बड़ी संख्या में भैया-बहन उपस्थित रहे।
विद्यालय के प्राचार्य लखनलाल साहू ने भेंटवार्ता में बताया कि सरस्वती शिशु मंदिर में शिशु वाटिका का शुभारंभ बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि यहां नन्हे बच्चों को खेल, गीत, कहानी, योग एवं रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से आनंददायक और तनावमुक्त वातावरण में शिक्षा प्रदान की जाएगी। बदलते समय में बच्चों को केवल पारंपरिक पढ़ाई तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि उन्हें अनुभव आधारित, रचनात्मक एवं संस्कारयुक्त शिक्षण से जोड़ना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से शिशु वाटिका की शुरुआत की गई है।



