देश के 36 में से 27 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश आपदा के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। बाढ़ के मैदानों पर अतिक्रमण और 2500 से ज्यादा संवेदनशील ग्लेशियल झीलें हैं।
देश के 36 राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में से 27 प्रदेश, आपदा के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील या जोखिम वाली स्थिति में हैं। हिमनदी झील के फटने से आने वाली बाढ़ (जीएलओएफ) की स्थिति में जोखिम का आकलन करने की तकनीक तो विकसित कर ली गई है, लेकिन इससे बचाव अभी तक एक चुनौती बना हुआ है। देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ मैदानी क्षेत्रों पर अतिक्रमण हो चुका है। नदी तल में अनियमित गतिविधियां जारी हैं। नदी बेसिन-स्तरीय योजना का अभाव है। ऐसे में अगर जीएलओएफ जैसा कुछ होता है तो उस दौरान जानमाल के बचाव का अचूक और सुरक्षित समाधान नजर नहीं आ रहा। देश में 25 सौ से अधिक ग्लेशियल झीलें संवेदनशील स्थिति में हैं तो वहीं हिमालय की 400 से अधिक ग्लेशियर झीलें तेजी से पिंघल रही हैं।
देश के अनेक भागों में बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्या इसलिए गंभीर हो जाती है, क्योंकि बाढ़ मैदानी क्षेत्रों पर अतिक्रमण हो चुका है। नदी तल में अनियमित गतिविधियां जारी हैं। नदी बेसिन-स्तरीय योजना का अभाव है। इसके चलते जब बाढ़ आती है तो भारी नुकसान होता है। अगर उक्त उपायों पर गंभीरता से काम हो तो जन-धन एवं संपत्ति की हानि को टाला जा सकता है। आपदा प्रबंधन पर डॉ. राधा मोहनदास अग्रवाल की अध्यक्षता वाली गृह मंत्रालय की संसदीय समिति की 261 वीं रिपोर्ट में यह बात कही गई है।




