देवदहरा में नवदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में रामचरित एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश, कथा सुनने उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया
थानखम्हरिया। समीपस्थ ग्राम देवदहरा में स्वर्गीय डॉ. संतराम साहू की पावन स्मृति में नवदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा एवं प्रवचन माला का आयोजन किया जा रहा है। कथा के दौरान आचार्य पंडित प्रमोद शास्त्री मानस केसरी जी महाराज ने श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन करते हुए भगवान श्रीराम एवं भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र तथा उनके जीवन से मिलने वाली शिक्षाओं पर प्रकाश डाला।

पं. प्रमोद शास्त्री जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत में सभी अवतारों का संक्षिप्त वर्णन मिलता है, जबकि भगवान श्रीकृष्ण की कथा विस्तारपूर्वक कही गई है। नवम स्कंध में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के चरित्र का वर्णन मिलता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम आज भी जन-जन में इसलिए लोकप्रिय हैं, क्योंकि उन्होंने समाज के हर वर्ग और प्रकृति के प्रति प्रेम एवं सम्मान का भाव रखा। उन्होंने पत्थरों, पेड़-पौधों, नाविकों, वनवासियों और आदिवासी समाज के लोगों से भी आत्मीयता का व्यवहार किया।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के समय पर्यावरण भी अत्यंत समृद्ध एवं सुंदर था। जगह-जगह फूलों की वाटिकाएं थीं तथा लता, पेड़-पौधे और फल-फूलों से प्रकृति सदा संपन्न रहती थी। नदियां, बाग-बगीचे और तालाब निर्मल जल से भरे रहते थे। भगवान राम के आदर्श शासन का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय समाज में सुख, समृद्धि और संतोष का वातावरण था।
“शासक चाहे तो परिस्थितियों को बदल सकता है”
पं. शास्त्री जी महाराज ने कहा कि समय और परिस्थितियों को सुधारने में राजा और शासन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि शासक दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कार्य करे तो खराब परिस्थितियों को भी सुधारा जा सकता है। भगवान श्रीराम का शासन इसका श्रेष्ठ उदाहरण है।
कृष्ण अवतार की कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण पूर्ण अवतार के रूप में प्रकट हुए। उन्होंने विभिन्न अत्याचारियों का अंत कर धर्म की स्थापना की। तृणावर्त और बकासुर जैसे प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने प्रकृति के विभिन्न तत्वों तथा पर्यावरण संरक्षण की ओर भी संकेत किया।
गोसेवा और गौ संरक्षण पर दिया जोर
पं. प्रमोद शास्त्री ने गोसेवा एवं गौ संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं गोपाल के रूप में जाने जाते हैं। भारतीय संस्कृति में गाय का विशेष महत्व रहा है। दूध, दही और घी का उपयोग धार्मिक एवं आयुर्वेदिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना गया है तथा देवपूजन में पंचामृत का विशेष स्थान है।
उन्होंने कहा कि आज गौ माता की स्थिति चिंताजनक है। केवल गायों को पकड़कर गौशाला में छोड़ देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। गौ माता के प्रति समाज के प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में प्रेम और सेवा की भावना जागृत होना आवश्यक है। जनता के साथ-साथ शासन-प्रशासन को भी गौ संरक्षण के लिए प्रभावी एवं संवेदनशील प्रयास करने चाहिए।
कथा के दौरान पं. शास्त्री महाराज ने सामाजिक एवं समसामयिक विषयों पर भी अपने विचार व्यक्त किए तथा विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा, प्रकृति संरक्षण, गोसेवा और मानवता का संदेश दिया।
ग्राम देवदहरा में आयोजित यह श्रीमद्भागवत कथा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक चल रही है। कथा श्रवण के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। आयोजन स्थल पर भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।




