ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया
थान खमरिया। पोला त्योहार के नजदीक आते ही नगर के बाजार में कुम्हारों द्वारा बनाए गए मिट्टी के बैल, बर्तन और खिलौने बिक्री के लिए सजने लगे हैं। पारंपरिक पोला पर्व को लेकर कुम्हार समाज के लोग कई सप्ताह पहले से ही उत्साहपूर्वक आकर्षक मिट्टी के बैल और अन्य सामग्री तैयार करने में जुट जाते हैं।
बाजार में मिट्टी से बने रंग-बिरंगे बैल, बर्तन एवं खिलौने लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। पोला पर्व पर विशेष रूप से मिट्टी के बैलों की पूजा की जाती है। इस अवसर पर किसान अपने पशुधन, विशेषकर बैलों का श्रृंगार कर उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पोला त्योहार के दौरान बैल दौड़ सहित विभिन्न पारंपरिक आयोजन भी किए जाते हैं।
ग्रामीण अंचलों में पोला पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिलता है। यह त्योहार किसानों और पशुधन के बीच गहरे संबंध तथा कृषि संस्कृति की परंपरा को दर्शाता है।
कुम्हार समाज के लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में मिट्टी से बनी सामग्री की खरीदारी में कमी आई है। इसके बावजूद त्योहार के समय मिट्टी के बैल, दीये, बर्तन और अन्य सामग्री बनाकर वे अपनी आजीविका अर्जित करते हैं। कुम्हारों को उम्मीद है कि पोला पर्व पर इस बार मिट्टी से बने पारंपरिक सामानों की अच्छी बिक्री होगी।




