हरतालिका तीज को लेकर थानखम्हरिया में भक्ति और उत्साह का माहौल
ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया
थानखम्हरिया। हरतालिका तीज (तीजा) पर्व को लेकर नगर सहित क्षेत्र में महिलाओं में उत्साह और आस्था का माहौल रहा। तीज व्रत से एक दिन पहले महिलाओं द्वारा करेले की सब्जी और चावल खाने की छत्तीसगढ़ी परंपरा को ‘करू भात’ कहा जाता है। करू भात ग्रहण करने के बाद महिलाएं हरतालिका तीज के दिन भगवान शिव एवं माता पार्वती की आराधना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं।
छत्तीसगढ़ी में ‘करू’ का अर्थ करेला और पके हुए चावल को ‘भात’ कहा जाता है। परंपरा के अनुसार तीज व्रत से एक दिन पूर्व शाम को करेले की सब्जी और भात का भोजन किया जाता है। कई परिवारों में इसके बाद खीर ग्रहण करने की भी परंपरा है। करू भात के बाद महिलाएं अगले दिन के निर्जला व्रत की तैयारी करती हैं। इसके पश्चात व्रत पूर्ण होने तक अन्न और जल का त्याग किया जाता है।

हरतालिका तीज के दिन महिलाएं पति की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए भगवान शिव एवं माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती की सखियां उन्हें अपने साथ वन में ले गई थीं, ताकि उनकी तपस्या में कोई बाधा न आए। इसी कारण इस व्रत का नाम हरतालिका पड़ा।
पर्व को लेकर महिलाओं ने सुबह से ही पूजा-अर्चना की तैयारियां शुरू कर दी थीं। नगर के बाजारों में साड़ी, श्रृंगार सामग्री, पूजा सामग्री सहित अन्य आवश्यक सामानों की खरीदारी करती महिलाएं नजर आईं। घरों से लेकर मंदिरों तक भक्ति का वातावरण बना रहा। महिलाओं ने पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव-पार्वती की आराधना की।




