ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया
थान खम्हरिया।
थान खम्हरिया नगर एवं आसपास के ग्रामीण अंचल में ‘माई’ के नाम से विख्यात माई मंदिर की संचालिका परम पूजनीय साध्वी पार्वती गिरी के देवलोक गमन पर नगर एवं क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धालुओं ने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए माई को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करने की कामना की है।
माई मंदिर के पुजारी पंडित रामविलास शर्मा ने भेंटवार्ता में बताया कि परम श्रद्धेय शांति गिरी माई एवं पार्वती गिरी माई का वर्ष 1962 में थान खम्हरिया नगर में आगमन हुआ था। दोनों देवी उपासक संन्यासी थीं और भगवा वस्त्र धारण करती थीं। पार्वती गिरी माई के सिर पर लंबी जटाएं थीं, जो जमीन तक स्पर्श करती थीं। श्रद्धालुओं में ऐसी मान्यता थी कि माई के दरबार में सच्चे मन से आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
बद्रीनाथ में हुई थी माई से भेंट
पंडित रामविलास शर्मा ने बताया कि स्वर्गीय शिवचरण लाल सिंघानिया, इंदर चंद पटेल, लक्ष्मी नारायण सिंघानिया, चौथमल अग्रवाल एवं लक्ष्मण केडिया सहित नगर के कुछ परिवार चारधाम यात्रा पर गए थे। इसी दौरान बद्रीनाथ में उनकी मुलाकात माई से हुई। माई की सहजता, सरलता और नम्र व्यवहार से प्रभावित होकर श्रद्धालुओं ने उन्हें थान खम्हरिया आने का निवेदन किया।
कुछ समय बाद पार्वती गिरी माई थान खम्हरिया पहुंचीं। यहां भक्तों से मिलकर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की और धीरे-धीरे नगरवासियों से घुल-मिल गईं। प्रारंभ में उन्होंने एक छोटी सी कुटिया बनाकर निवास किया। धीरे-धीरे श्रद्धालुओं का आना-जाना बढ़ने लगा और समाज के सहयोग से मंदिर का निर्माण कराया गया।
झोपड़ीनुमा मंदिर से भव्य मंदिर तक का सफर
बताया जाता है कि प्रारंभ में माई का मंदिर झोपड़ीनुमा खपरैल मकान में स्थापित था। स्वर्गीय मालूराम जी सिंघानिया को राम राज्य परिषद् से टिकट मिला था। चुनाव में सफलता के लिए आशीर्वाद लेने वे माई के दरबार पहुंचे थे। उस समय उन्होंने चुनाव जीतने पर मंदिर निर्माण कराने की बात कही थी। चुनाव में विजय प्राप्त होने के बाद उनके द्वारा मंदिर निर्माण कराया गया। मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा भरत गिरी (शिवरीनारायण) के द्वारा कराई गई।
माई के सानिध्य में मंदिर परिसर में समय-समय पर धार्मिक आयोजन, भागवत कथा एवं यज्ञ आदि का आयोजन विद्वान आचार्यों के माध्यम से होता रहा। धार्मिक आयोजनों की यह परंपरा आज भी मंदिर के पुजारी पंडित रामविलास शर्मा के संचालन में जारी है।
11 सितंबर को बनारस में हुआ देवलोक गमन
पंडित रामविलास शर्मा ने बताया कि साध्वी पार्वती गिरी माई का 11 सितंबर 2026 को बनारस स्थित उनके आश्रम में निधन हो गया। उनका अंतिम धार्मिक कार्यक्रम 26 सितंबर 2026 को वाराणसी के अस्सी घाट में आयोजित किया जाएगा, जिसमें उनके भक्त एवं श्रद्धालु शामिल होंगे। इस अवसर पर संत-महात्माओं के लिए भोज सहित अन्य धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
माई के कार्यक्रम को विधि-विधान से संपन्न कराने के लिए श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा एवं सामर्थ्य के अनुसार दान स्वरूप राशि भेंट की है। अस्सी घाट, बनारस में धार्मिक एवं अंतिम क्रियाकर्म संपन्न होने के बाद थान खम्हरिया स्थित मंदिर में भी भोज एवं शोक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
श्रद्धालुओं के दुख हरने वाली थीं माई
श्रद्धालुओं का कहना है कि माई में दिव्य आध्यात्मिक शक्ति थी। उनकी कृपा मात्र से कई कठिन परिस्थितियां शुभ कार्यों में बदल जाती थीं। लोग अपने दुख-दर्द लेकर पूरी श्रद्धा एवं समर्पण के साथ उनके दरबार में पहुंचते थे और उन्हें विश्वास था कि माई उनके कष्टों के निवारण का मार्ग प्रशस्त करेंगी।
माई के दरबार में आम से लेकर खास व्यक्ति तक श्रद्धा के साथ पहुंचते थे। उन्होंने कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। नगर के अनेक लोग आज भी मानते हैं कि उनके जीवन की प्रगति और सुख-समृद्धि में माई की असीम कृपा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके ब्रह्मलीन होने से नगर एवं आसपास के श्रद्धालुओं में शोक की लहर है।




