संसार की सारी समस्या व शंका का समाधान भागवत में है
भाटापारा = नेहरू वार्ड स्थित श्याम सोनी ,रितेश सोनी परिवार द्वारा पितरों के मोक्षार्थ आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह में भक्ति की गंगा बह रही है जिसका भगवत प्रेमी जन भरपूर लाभ ले रहे है । व्यास पीठ में कथा वक्ता के रूप में भाटापारा निवासी पंडित हरगोपाल शर्मा द्वारा ओज पूर्ण वाणी से भगवान व उनके भक्तों के दिव्य चरित्र एवं लीला का सरस व सरल भाषा में व्याख्यान किया जा रहा है ।भागवत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि भागवत समस्त वेदों व उपनिषदों का सार है चित्त की शुद्धि व पाप के नाश के लिए भागवत से अधिक कल्याणकारी कोई दूसरा उपाय नहीं है जिसके घर में भागवत के आधे श्लोक या श्लोक के एक पद का पाठ होता है वहां राजसूय व अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है संसार की सारी समस्या व शंका का समाधान भागवत में है जीव के एक जन्म नहीं अन्नत जन्मों के पुण्य उदय होते है तो ही भागवत श्रवण में रुचि हो पाती है धन,पुत्र,घर, वाहन,पत्नी,एवं राज्य प्राप्ति सहित समस्त कामनाओं की पूर्ति श्रीमद् भागवत महापुराण के आश्रय से हो जाती है व्यक्ति अगर अपना कल्याण चाहता है तो उसे उस सत्य स्वरूप भगवान का चिंतन सदैव करते रहना चाहिए जिसकी इच्छा मात्र से यह विश्व पालित और लय होता है ।

कलिकाल के सारे दोष व तीन प्रकार के तापों को विनष्ट करने का सामर्थ अगर किसी है,तो वो है भगवान का नाम,इसलिए मनुष्य हो हर परिस्थिति में भगवन नाम का आश्रय लेना चाहिए । भगवान को भूल जाना ही विपत्ति है और भगवान की याद बनी रहे यही सबसे बड़ी संपत्ति है। जिसमें भक्ति नहीं उसका जन्म व्यर्थ है । अर्थात प्राणी को तप,व्रत,तीर्थ,योग, यज्ञ आदि परिश्रम करने की आवश्यकता नहीं मुक्ति देने में एक मात्र भक्ति ही समर्थ है,जब प्राणी के मन में भक्ति का उदय होगा तभी ज्ञान प्राप्त होगा ज्ञान से वैराग्य होगा वैराग्य होने पर ही प्राणी त्याग करने में सक्षम हो सकता है ।पंडित हरगोपाल शर्मा ने कहा कि भगवान न किसी को सुख देते है ना ही दुख मनुष्य को ये उसके द्वारा किए गए कर्मों के द्वारा ही प्राप्त होते है जैसे गाय का बछड़ा हजारों गायों के बीच अपनी माता को पहचान लेता है उसी प्रकार मनुष्य के द्वारा किए गए अच्छे व बुरे कर्म उसे पहचान कर उसका फल अवश्य देते है उन्होंने सुकदेव जी व राजा परीक्षित के जन्म की कथा कलियुग के गुण व दोष के प्रसंग व भगवान के विभिन्न अवतारों के साथ ही कपिल नारायण व देवहूति संवाद की कथा को बड़े विस्तार से सुनाया देवहूति ने कपिल भगवान से पूछा कि मेरे जीवन में पूर्णता क्यों नहीं महसूस होती तो कपिल नारायण ने कहा पूर्ण से जुड़ाव होने पर ही पूर्णता महसूस होगी ये मन ही जीवों के बंधन व मोक्ष का कारण है जब मन ईश्वर में लग जाता है तो मुक्ति दाता होता है और जब सांसारिक विषयों में रम जाता है तो बंधन का कारण होता है मन को बस में करना वायु को बस में करने के समान दुष्कर है,कपिल नारायण कहते है जो प्राणी सांसारिक वासना को छोड़ एक मुझे ही अनन्य भाव से भजते है उनको मैं संसार सागर से पार कर देता हूं ।कपिल नारायण से भक्ति योग,ध्यान योग,जीव के गर्भवास का वर्णन सुन देवहूति माता का मोह पटल नष्ट हुआ ।
ध्रुव चरित्र पर उन्होंने कहा कि जीवन में नारद जी जैसे संतो का सानिध्य प्राप्त हो जाए तो व्यक्ति नर से नारायण के पद को प्राप्त कर सकता है ,जड़ भरत के पूर्व जन्म पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किसी पर आसक्ति ही जीव के बंधन का कारण बनती है अजामिल उपाख्यान सुनाते हुए पंडित हरगोपाल शर्मा जी ने कहा जिसने एक बार भी अपने मन को भगवान में लगा दिया उसे स्वप्न में भी यमदूतों के दर्शन नहीं होते । जिस प्रकार अनेक नदियां मदिरा से भरे घड़े को पवित्र नहीं कर सकती उसी प्रकार भगवान से विमुख प्राणी प्रायश्चित से शुद्ध नहीं हो सकता उसकी शुद्धि का एक मात्र उपाय भगवान का नाम एवं कथा है अपने पुत्र नारायण का अंत समय में नाम लेने से अजामिल जैसे पापी का कल्याण हो गया तो श्रद्धावान भक्त का कल्याण तो अवश्यंभावी है । प्रहलाद चरित्र सुनाते हुए कहा देव,वेद,ब्राह्मण,साधु व धर्म से द्वेष करने वाला शीघ्र नष्ट हो जाता है जिसका उदाहरण हिरण्यकश्यपु है प्रहलाद जी अपनी माता के गर्भ में ही नारद जी से भगवान की कथा सुनी उसका प्रभाव यह हुआ दैत्य कुल में जन्म लेने के बाद भी प्रहलाद जी भगवान के अनन्य भक्त हुए जिनके वचनों को स्थापित करने के लिए भगवान को जड़ रूपी खम्भ से चैतन्य रूप नरसिंह अवतार ले प्रकट होना पड़ा यही भक्त व भक्ति की महिमा है । शर्मा जी ने समस्त मातृ शक्ति से अनुरोध किया प्रत्येक गर्भवती माता को गर्भावस्था के समय भगवान की कथा सुननी एवं अच्छे साहित्य पढ़ने चाहिए उसका प्रभाव होने वाली संतान में अवश्य दिखाई देगा । कथा श्रवण करने काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है ।




