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सरस्वती शिशु मंदिर में अभिभावक सम्मेलन, विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य पर हुआ मंथन

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ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया

थानखम्हरिया। सरस्वती शिक्षा संस्थान छत्तीसगढ़ की योजनानुसार स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर थानखम्हरिया में प्राथमिक वर्ग कक्षा अरुण से पंचम तक के अभिभावकों का सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ विद्यालय एवं अभिभावकों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना रहा। इस दौरान विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य, अनुशासन, संस्कार, सदाचार एवं जिम्मेदारी की भावना विकसित करने को लेकर विस्तार से मंथन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि हरीश लूनिया (कवर्धा), अभिभावक शंकर लाल शर्मा, प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष पुरुषोत्तम अग्रवाल, उपाध्यक्ष सुरेश सिंघानिया, व्यवस्थापक राकेश जोशी एवं सहसचिव पुरुषोत्तम सिंघानिया ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अतिथि परिचय प्राचार्य लखन लाल साहू ने कराया।

सम्मेलन में अनेक अभिभावकों ने अपने पाल्य-पाल्याओं से संबंधित समस्याएं एवं सुझाव रखे। प्रबंध समिति ने अभिभावकों की बातों को गंभीरतापूर्वक सुनते हुए समस्याओं पर मनन-चिंतन कर उचित समाधान का आश्वासन दिया। साथ ही अभिभावकों से घर पर बच्चों के नियमित अध्ययन की निगरानी करने तथा आचार्यों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया गया।

मुख्य अतिथि हरीश लूनिया ने अपने उद्बोधन में बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों से जीवन के छोटे-छोटे दैनिक कार्य अवश्य करवाने चाहिए। माता-पिता बच्चों की उचित देखभाल के साथ इस बात पर भी सतत निगाह रखें कि वे किन लोगों के साथ रहते हैं और किस प्रकार के वातावरण में उनका उठना-बैठना है। उन्होंने कहा कि परीक्षा में प्राप्त अच्छे अंकों को ही बच्चों की श्रेष्ठता का पैमाना नहीं मानना चाहिए, बल्कि उनमें विद्यमान अन्य क्षेत्रों की प्रतिभा एवं कुशलता को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

उन्होंने अभिभावकों से बच्चों में अनुशासन, संस्कार, सदाचार और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि बच्चों को स्वामी विवेकानंद, छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, मदालसा और रानी लक्ष्मीबाई जैसे महान व्यक्तित्वों के आदर्शों से प्रेरणा लेने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने आचार्यों से शिक्षा को अधिक गुणकारी एवं प्रभावी बनाने के लिए निरंतर नवाचार अपनाने की बात कही।

लूनिया ने अभिभावकों को विद्यालय का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि जब माता-पिता अपने बच्चों को विद्यालय भेजते हैं, तभी विद्यालय की व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था आगे बढ़ती है। उन्होंने विद्यालय एवं अभिभावकों के बीच निरंतर संवाद और सहयोग को विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक बताया।

प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष पुरुषोत्तम अग्रवाल ने सभी पालकों से विद्यालय के विकास में सतत एवं महती योगदान देने का आग्रह किया। उपाध्यक्ष सुरेश सिंघानिया ने अभिभावकों से अपनी समस्याएं एवं सुझाव बेहिचक विद्यालय प्रबंधन के समक्ष रखने की बात कही।

सम्मेलन में विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए विद्यालय परिवार और अभिभावकों के बीच समन्वय मजबूत करने, घर पर बच्चों की पढ़ाई की नियमित निगरानी रखने तथा आचार्यों से निरंतर संपर्क बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। विद्यार्थियों में अनुशासन, संस्कार, सदाचार एवं जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए अभिभावकों और आचार्यों के संयुक्त प्रयासों को आवश्यक बताया गया।

अंत में व्यवस्थापक राकेश जोशी ने पालकों द्वारा रखी गई समस्याओं एवं सुझावों का उल्लेख करते हुए सभी अतिथियों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन मुकेश राजपूत ने किया। शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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