थानखम्हरिया, । एकादशी के पावन अवसर पर शंकर लालजी अग्रवाल एवं श्रीमती सरस्वती अग्रवाल के निवास पर 6 अक्टूबर को एकादशी सतसंग का आयोजन किया गया जिसमें श्री रामहर्षण कुंज के महंत वैष्णवदास जी ने एकादशी महात्म्य पर विस्तृत प्रकाश डाला। दंतेश्वरी महिला मण्डल ने भजन कीर्तन किया जिससे वातावरण धार्मिक बन गया।
इस अवसर पर महंत वैष्णव दास जी ने कहा कि भक्त के मन में भगवान के प्रति श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का भाव होना चाहिए। आवश्यकता इस बात की है कि मन सदैव भगवान के प्रति समर्पित रहे। वर्तमान समय में मनुष्य स्वयं के गलत आचरण के कारण अनेक प्रकार के दुखों का सामना कर रहा है। ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा, संयम और सदाचार से जीवन को सुखमय बनाया जा सकता है।
उन्होंने एकादशी व्रत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। एकादशी का संबंध शरीर की दस इंद्रियों और एक मन सहित कुल 11 के संयम से माना जाता है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने तथा पापों से मुक्ति पाने के लिए एकादशी व्रत को श्रेष्ठ एवं महत्वपूर्ण व्रत माना गया है।
महंत वैष्णव दास ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी व्रत के पालन से मनुष्य को आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है तथा जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण माना गया है। नियमित रूप से व्रत एवं धार्मिक आचरण करने से घर-परिवार में सुख, समृद्धि और शांति का वातावरण बनता है। उन्होंने निर्जला एकादशी को कठिन एवं अत्यंत पुण्यदायी व्रत बताते हुए कहा कि ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास, श्रद्धा और समर्पण आवश्यक है। अहंकार का त्याग कर स्वयं को ईश्वर की इच्छा के अनुरूप समर्पित करना ही सच्ची भक्ति है। उन्होंने कहा कि भक्त का ईश्वर और गुरु की शक्ति पर पूर्ण विश्वास एवं भरोसा होना चाहिए। निष्कपट समर्पण में केवल अटूट विश्वास और भक्ति का भाव होता है। आयोजन में श्री राधा-कृष्ण जमात मंदिर के महंत बसंत बिहारी दास, बलदेव केडिया, सुरेश सिंघानिया, अनिल सिंघानिया, पुरुषोत्तम अग्रवाल, ओम अग्रवाल, गौतम केडिया, विक्रम दास वैष्णव, अशोक अग्रवाल, राजेंद्र बिंदल, गोदावरी मिश्रा, मीना नामदेव, अन्नपूर्णा वैष्णव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।



