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नवरात्र के पावन अवसर पर आयोजित ग्राम बुचिपुर में श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा महोत्सव

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बेमेतरा। प्रख्यात प्रवक्ता आचार्य झम्मन प्रसाद शास्त्री ने सारगर्भित सुमधुर वाणी से नवरात्र पर्व एवं देवी महिमा का विस्तार पूर्वक व्याख्यान में बताया कि शारदीय नवरात्र पर्व देवी शक्ति प्राप्त करने का पर्व है । जिसमें सनातन परंपरा से पर्व उत्सवों को मनाया जाता है। लेकिन ध्यान रहे उत्सव के नाम पर दिशाहीनता न आवे तथा राष्ट्र में सात्विकता सदाचार संयम सद्भाव परस्पर प्रेम ,शांति, अहिंसा के प्रति आस्था बढे इसलिए भारतीय संस्कृति सात्विक यज्ञों की महिमा बताइए कोई भी वैदिक यज्ञ शास्त्र सम्मत विधान पूर्वक किया जाए ।यज्ञों के संपादन से पर्यावरण शुद्ध रहता है।

तथा समाज में एकता, प्रेम, भाईचारा का संदेश प्राप्त होता है। ध्यान रहे विधिहीन शास्त्रीय परंपरा से यज्ञ संपादन नहीं होने पर अरिष्ट फल प्राप्त होता है। जैसा कि आजकल विधि विधान पर ध्यान नहीं है। द्रव्य शुद्धि, क्रिया शुद्ध, और भावना की प्रवृत्ति पवित्रता से ही यज्ञ सफल होता है। यज्ञ संपादन में गौ माता का विशेष महत्व है। शास्त्री जी ने कहा कथा प्रसंग का विस्तार करते हुए देवी भागवत की कथा के वर्णन में गंगा मां ,गौ माता, तुलसी माता , वर्णन में शंख, भस्म ,रुद्राक्ष की महिमा के विषय में आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक स्वरूपों का विवेचन किया। सरस्वती मां को प्रसन्न करने के लिए सात्विक भाव से त्याग, संयम, सेवा, तपस्या, साधना, स्वाध्याय के प्रति अवस्था को बढ़ाने की आवश्यकता है। गुरुदेव शंकराचार्य इसलिए प्रेरणा देते हैं। कि गुरु ,गोविंद और ग्रंथ का बल जीवन में हो तभी जीवन सार्थक है। अलग-अलग समाज के लोग सनातन धर्म के देवी देवताओं को बांट दिए हैं। इसलिए सनातन धर्म भी बटा हुआ है ।हम सब एक है ।और सभी हिंदुओं के देवी देवता एक है। हम लोगों को मिलकर रहने से सनातन धर्म संगठित होगा। एकता बनी रहेगी। प्रत्येक हिंदू परिवार से 1 रूपय का अंशदान निकले। आचार्य शास्त्री जी ने कहा कि प्रत्येक हिंदू परिवार से एक-एक अंशदान निकालने तथा एक घंटा सेवा के लिए निकाले जिससे सनातन धर्म का प्रचार समाज सेवा एवं राष्ट्रीय एकता की भावना प्रतिष्ठित हो। प्राप्त रूपयो का उपयोग अपने क्षेत्र को संस्कृत सुबोध तथा स्वालंबी बनाने में हो सेवा कार्य तथा रचनात्मक कार्य संपादन में अर्थ का विनियोग हो ।प्रत्येक साप्ताहिक सेवा का कार्य अनिवार्य हो। तथा सामूहिक सुंदरकांड, हनुमान चालीसा का पाठ हो। हर व्यक्ति प्रतिदिन करें ।इस दिव्य महायज्ञ महोत्सव में देवी भागवत की दिव्य कथा महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती एवं समस्त ऋषि महात्माओं की कथा गायत्री की महिमा रुद्राक्ष की महिमा समस्त श्रद्धालु भक्त सुंदर ढंग से शास्त्री जी के मुखारविंद से कथा का रसपान कर रहे हैं । अंत मे भगवान बाल कृष्ण लाल का जन्म महोत्सव मनाया गया तथा कथा आयोजक समस्त सदस्य एवं समस्त ग्राम वासियों के द्वारा मंगल आरती हुई ।

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