सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों के बाद भी समस्याएं जस की तस, संगठन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया
थान खम्हरिया। राजनीति में इन दिनों जमीनी स्तर पर काम करने के बजाय प्रचार-प्रसार और नेताओं के साथ फोटो खिंचवाने की प्रवृत्ति बढ़ने को लेकर पार्टी के भीतर ही असंतोष सामने आने लगा है। एक ओर जहां कुछ नेता सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ मुलाकात कर फोटो खिंचवाने तथा उसे प्रचारित करने में व्यस्त नजर आते हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को जनता की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री, सांसद और विधायक तक अपनी समस्याएं पहुंचाने तथा सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद कई मामलों में समाधान नहीं हो पा रहा है। शिकायतों के निराकरण के नाम पर संबंधित विभागों द्वारा पुराने दस्तावेजों और जवाबों का पुलिंदा आवेदकों को भेज दिया जाता है, लेकिन वास्तविक समस्या जस की तस बनी रहती है। इससे आम जनता में निराशा बढ़ रही है और कार्यकर्ताओं को लोगों के सवालों का जवाब देना मुश्किल हो रहा है।
प्रचार पर जोर, समस्याओं के समाधान की दरकार
कार्यकर्ताओं के अनुसार, राजनीतिक गतिविधियों में पोस्टर, फ्लेक्स, फोटो और विज्ञापनों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। समाचार पत्रों में नेताओं के फोटो और प्रचार सामग्री दिखाई देती है, लेकिन जनता से जुड़े मुद्दों के समाधान की जानकारी कम ही सामने आती है। इससे लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे समर्पित कार्यकर्ताओं में निराशा और असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है।
कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि सरकार के कार्यकाल के लगभग तीन वर्ष पूरे होने की ओर बढ़ने के बावजूद यदि जनता की समस्याओं का समय पर निराकरण नहीं होता है, तो इसका असर सरकार और संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों की धारणा पर पड़ सकता है। संगठन को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी संभालने वाले पदाधिकारियों से अपेक्षा है कि वे केवल बैठकों और मुलाकातों तक सीमित न रहें, बल्कि कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सुनें और उनके समाधान के लिए ठोस पहल करें।
जमीनी कार्यकर्ताओं की सुनवाई जरूरी
राजनीतिक संगठन की मजबूती का आधार उसके जमीनी कार्यकर्ता होते हैं। वे ही आम लोगों के बीच रहते हैं, उनकी समस्याएं सुनते हैं और शासन-प्रशासन तक उनकी बात पहुंचाते हैं। ऐसे में जब शिकायतों का समाधान नहीं होता, तो सबसे पहले सवालों का सामना इन्हीं कार्यकर्ताओं को करना पड़ता है।
कार्यकर्ताओं की अपेक्षा है कि संगठन और सरकार के स्तर पर जनसमस्याओं की नियमित समीक्षा हो, सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों का वास्तविक निराकरण सुनिश्चित किया जाए तथा जवाबदेह अधिकारियों से समयबद्ध कार्रवाई कराई जाए। साथ ही, प्रचार-प्रसार के साथ जनसेवा और जमीनी काम को भी प्राथमिकता दी जाए।
अब देखना होगा कि संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारी इन चिंताओं को कितनी गंभीरता से लेते हैं और व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाते हैं। क्योंकि जनता की समस्याओं का समाधान और जमीनी कार्यकर्ताओं का सम्मान ही किसी भी संगठन की विश्वसनीयता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


