आरएसएस के भव्य पथ संचलन में गूंजा स्वदेशी, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभक्ति का संदेश
ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया
थान खम्हरिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साजा खंड द्वारा विजयादशमी उत्सव एवं संघ का 101वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूर्ण गणवेश में सैकड़ों स्वयंसेवकों ने घोष की गूंज और कदमताल के साथ नगर में भव्य पथ संचलन किया। संचलन के दौरान अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का आत्मीय स्वागत किया। पूरा नगर देशभक्ति और भगवामय वातावरण से सराबोर नजर आया।
पथ संचलन दोपहर दो बजे सरस्वती शिशु मंदिर, साजा से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए पुराना बाजार चौक में संपन्न हुआ। इसके बाद शाम चार बजे मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त शिक्षक एवं सामाजिक कार्यकर्ता बलराम वर्मा उपस्थित रहे। वहीं, मुख्य वक्ता के रूप में दुर्ग विभाग के विभाग कार्यवाह संजय पांडेय ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया।
राष्ट्रभक्ति का अर्थ कर्तव्यों का पालन करना
संजय पांडेय ने कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 27 सितंबर 1925 को नागपुर में हिंदू समाज को संगठित, अनुशासित और सशक्त बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। समाज में सोए हुए ‘स्व’ को जगाने के उद्देश्य से पांच स्वयंसेवकों के साथ शुरू हुई यह यात्रा आज राष्ट्र को सशक्त बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।
उन्होंने राष्ट्रभक्ति की व्यावहारिक परिभाषा बताते हुए कहा कि केवल नारे लगाना ही देशभक्ति नहीं है, बल्कि देश के संविधान और कानूनों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का पहला कर्तव्य है। दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना और चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाना भी जिम्मेदार नागरिक होने और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य निभाने का हिस्सा है।
स्वदेशी अपनाने और सांस्कृतिक विरासत बचाने पर जोर
विदेशी संस्कृति के अंधानुकरण पर चिंता जताते हुए उन्होंने लोगों से जंक फूड के स्थान पर पारंपरिक मोटे अनाज कोदो, कुटकी और रागी को अपनाने की अपील की। साथ ही स्वदेशी वस्त्रों और हथकरघा उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर देश की अर्थव्यवस्था और स्थानीय कारीगरों को मजबूती दी जा सकती है।
समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि परिवारों को सप्ताह में कम से कम एक दिन साथ बैठकर भोजन करना चाहिए, भजन करना चाहिए और अपनी सांस्कृतिक विरासत पर चर्चा करनी चाहिए। इससे पारिवारिक संबंध मजबूत होंगे और नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़ी रहेगी।

सामाजिक समरसता से मजबूत होगा राष्ट्र
सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए संजय पांडेय ने कहा कि हम सभी भारत माता की संतान हैं। इसलिए समाज में ऊंच-नीच, जातिवाद और छुआछूत जैसी बुराइयों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। समाज के प्रत्येक व्यक्ति के प्रति सम्मान और समानता का भाव रखना आवश्यक है।
उन्होंने भारत के गौरवशाली इतिहास तथा नालंदा और तक्षशिला जैसे प्राचीन ज्ञान केंद्रों का उल्लेख करते हुए देश की सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत पर गर्व करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने समाज को देश की एकता और स्थिरता को प्रभावित करने वाली विचारधाराओं एवं गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने की बात कही।
कार्यक्रम में बेमेतरा जिला संघचालक राजकुमार देवांगन, साजा खंड संघचालक पंचराम सिन्हा, दुर्ग विभाग के पर्यावरण संयोजक नूतन राम साहू, साजा विधायक ईश्वर साहू, नगर पंचायत अध्यक्ष हिमांशु वर्मा सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक एवं नगरवासी उपस्थित रहे।



