धान की फसल के डिजिटल सर्वे और किसानों के पंजीयन पर भी मंडराने लगा संकट, आम जनता परेशान
ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया
थान खम्हरिया। पटवारी संघ की पिछले 10 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब आम जनता से लेकर प्रशासनिक कामकाज तक दिखाई देने लगा है। पटवारियों के काम से दूर रहने के कारण नक्शा, बंटवारा, प्रमाणीकरण, नामांतरण और सीमांकन सहित राजस्व से जुड़े कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। तहसील और एसडीएम कार्यालयों में विभागीय प्रतिवेदन नहीं मिलने से अनेक राजस्व प्रकरणों की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इससे लोगों को अपने जरूरी कामों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
हड़ताल के चलते राजस्व विभाग के नियमित कामकाज के साथ सर्वेक्षण, कृषि एवं लगानी भूमि से जुड़े कार्य, निर्वाचन और आपदा राहत प्रबंधन से संबंधित जिम्मेदारियां भी प्रभावित हो रही हैं। सबसे बड़ी चुनौती धान की फसल के डिजिटल सर्वे को लेकर सामने आ रही है। पटवारियों के काम से दूर रहने के कारण प्रशासन को निजी सर्वेयरों का सहारा लेना पड़ रहा है। हालांकि, सर्वे के दौरान तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएं भी सामने आ रही हैं।

पटवारी संघ का कहना है कि कई खसरों के नक्शों में बटांकन उपलब्ध नहीं होने के कारण डिजिटल सर्वे करने में परेशानी होती है। ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से सर्वे कार्य पूरा करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। वहीं, आगामी धान खरीदी का समय नजदीक आने के साथ किसानों के पंजीयन और खरीदी की तैयारियों पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
किसानों और आम जनता की बढ़ी परेशानी
राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित होने से आम नागरिकों को नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अभिलेखों के प्रमाणीकरण जैसे जरूरी कामों के लिए परेशान होना पड़ रहा है। किसानों के लिए भी डिजिटल सर्वे और पंजीयन समय पर पूरा होना महत्वपूर्ण है, ताकि धान खरीदी के दौरान किसी प्रकार की दिक्कत न आए।
वर्तमान स्थिति में राजस्व व्यवस्था का प्रभावित होना गंभीर चिंता का विषय बन गया है। यदि हड़ताल लंबी खिंचती है, तो इसका असर किसानों के पंजीयन और धान खरीदी की तैयारियों पर पड़ सकता है।
सरकार से तत्काल समाधान की मांग
इस स्थिति को देखते हुए मांग की जा रही है कि भाजपा सरकार पटवारी संघ से तत्काल संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का समाधान निकाले और प्रभावित राजस्व कार्यों को जल्द बहाल करे। इससे आम जनता को राहत मिलेगी, किसानों का पंजीयन समय पर पूरा हो सकेगा और आगामी धान खरीदी की प्रक्रिया प्रभावित होने से बचाई जा सकेगी।



