पॉक्सो एक्ट सहित बाल संरक्षण से जुड़े कानूनों की दी गई जानकारी, बच्चों को सुरक्षित एवं भयमुक्त बचपन के प्रति किया जागरूक
ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया
थान खम्हरिया, । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती सरोज नन्द दास के मार्गदर्शन में जिले के विभिन्न विद्यालयों में “कानून जानो, बचपन बचाओ” अभियान के तहत विधिक जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देना तथा बाल शोषण, बाल विवाह, बाल श्रम और लैंगिक अपराधों से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति जागरूक करना है।
इसी क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बेमेतरा के तत्वावधान में सचिव श्रीमती स्वर्णलता ओम यादव तथा व्यवहार न्यायाधीशों की उपस्थिति में जिले के विभिन्न विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें प्रथम व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ श्रेणी श्री शुभम नामदेव, कु. प्रज्ञा वैष्णव एवं कु. ज्योति शर्मा सहित अन्य न्यायिक अधिकारियों की सहभागिता रही।

कार्यक्रम के अंतर्गत रेडियंस पब्लिक स्कूल लोलेसरा, शासकीय हाई स्कूल लोलेसरा, शासकीय मिडिल स्कूल उघरा, हथमुड़ी एवं भीजाभाट तथा शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल जेवरी सहित विभिन्न विद्यालयों में विद्यार्थियों को बाल अधिकारों और संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।
बच्चों को उनके अधिकारों एवं सुरक्षा के प्रति किया जागरूक
शिविरों में बताया गया कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, सम्मान और भयमुक्त बचपन प्राप्त करने का अधिकार है। बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार, शोषण, उपेक्षा एवं अधिकारों के उल्लंघन को रोकने में परिवार, विद्यालय और समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है। बाल संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों और आम नागरिकों को भी संबंधित कानूनों की जानकारी होना आवश्यक है।
बाल संरक्षण से जुड़े प्रमुख कानूनों की दी जानकारी
जागरूकता कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को बाल संरक्षण से संबंधित प्रमुख कानूनों के बारे में विस्तार से बताया गया।
पॉक्सो एक्ट, 2012: लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत बच्चों को यौन शोषण एवं लैंगिक अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने वाले कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। साथ ही ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों को सूचना देने तथा पीड़ित बच्चे की गरिमा, सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने के महत्व को समझाया गया।
बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम: बच्चों और किशोरों के नियोजन पर लागू प्रतिबंधों तथा खतरनाक व्यवसायों एवं प्रक्रियाओं से संबंधित प्रावधानों की जानकारी देते हुए बच्चों को शोषणकारी श्रम से बचाने और उनकी शिक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006: विद्यार्थियों को बाल विवाह की रोकथाम से संबंधित कानूनी प्रावधानों से अवगत कराया गया। बताया गया कि वर्तमान सामान्य कानूनी प्रावधानों के अनुसार विवाह के लिए पुरुष की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिला की न्यूनतम आयु 18 वर्ष है। बाल विवाह की जानकारी मिलने पर संबंधित अधिकारियों को सूचित करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
किशोर न्याय अधिनियम, 2015: देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों तथा कानून का उल्लंघन करने के आरोप वाले बच्चों के लिए निर्धारित विशेष कानूनी व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009: विद्यार्थियों को बताया गया कि 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा का प्रावधान है। बच्चों तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने में अभिभावकों, विद्यालयों और समाज की भूमिका को भी रेखांकित किया गया।
संकट की स्थिति में हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को शोषण, उत्पीड़न या किसी अन्य संकट की स्थिति में सहायता प्राप्त करने के तरीकों से भी अवगत कराया गया। बच्चों की सहायता के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 तथा आपातकालीन सहायता के लिए 112 की जानकारी दी गई। इसके साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बेमेतरा के माध्यम से पात्र व्यक्तियों को उपलब्ध निःशुल्क विधिक सहायता एवं कानूनी मार्गदर्शन के बारे में भी बताया गया।
10 अक्टूबर से शुरू हुआ अभियान, 31 अक्टूबर तक होंगे कार्यक्रम
“कानून जानो, बचपन बचाओ” अखिल भारतीय विद्यालय जागरूकता अभियान का शुभारंभ 10 अक्टूबर 2026 को हुआ। अभियान के प्रथम चरण के अंतर्गत 26 से 31 अक्टूबर 2026 तक जिले के विद्यालयों में सघन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, बाल संरक्षण कानूनों तथा शोषण या उत्पीड़न की स्थिति में उपलब्ध कानूनी सहायता के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
इसी अभियान के तहत कु. माला यादव, व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ श्रेणी एवं अध्यक्ष, तालुका विधिक सेवा समिति, साजा की उपस्थिति में शासकीय हायर सेकेंडरी कन्या विद्यालय, साजा में भी विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें छात्राओं को बाल संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों, उनके अधिकारों तथा स्वयं की सुरक्षा के उपायों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रमों में महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रतिनिधियों तथा अधिकार मित्रों की भी उपस्थिति रही। अभियान के माध्यम से बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनने, किसी भी प्रकार के शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के लिए सुरक्षित, संरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करना और बाल अधिकारों के संरक्षण के प्रति समाज में सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।



