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मारवाड़ी समाज की महिलाओं ने की अहोई अष्टमी माता की पूजा-अर्चना, संतान सुख एवं खुशहाली की मांगी कामना

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संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत, तारों को अर्घ्य देकर किया व्रत का पारण

ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया

थान खम्हरिया। नगर में मारवाड़ी समाज की महिलाओं ने अहोई अष्टमी का पर्व श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया। इस अवसर पर महिलाओं ने विधि-विधान से अहोई माता की पूजा-अर्चना कर अपनी संतान की सुख-समृद्धि, दीर्घायु एवं खुशहाल जीवन की कामना की। महिलाओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखकर शाम को अहोई माता की कथा सुनी और पूजा-अर्चना की।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अहोई अष्टमी की कथा एक साहूकार परिवार और अहोई माता की कृपा से जुड़ी हुई है। कथा के अनुसार साहूकार की पत्नी से अनजाने में हुई गलती के कारण उसके जीवन में संतान संबंधी संकट उत्पन्न हो गया था। अपनी गलती का एहसास होने पर उसने सच्चे मन से अहोई माता की आराधना और व्रत किया। उसकी सच्ची श्रद्धा और भक्ति से प्रसन्न होकर माता ने उसे संतान सुख का आशीर्वाद प्रदान किया। तभी से महिलाएं अपनी संतान की रक्षा और लंबी आयु के लिए अहोई अष्टमी का व्रत करती आ रही हैं।

मारवाड़ी समाज की महिलाएं दीपावली से पूर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को एकत्रित होकर अहोई माता की कथा सुनती हैं और परंपरागत तरीके से पूजा-अर्चना करती हैं। इस दिन महिलाएं संतान की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को तारों के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करती हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार अहोई माता को माता पार्वती का स्वरूप माना जाता है। उन्हें संतान की रक्षक और बच्चों को दीर्घायु प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। अहोई अष्टमी का यह पर्व मातृत्व, श्रद्धा और संतान के प्रति अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है।

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